Akbar Birbal Story In Hindi | अकबर-बीरबल की कहानियां (2021)

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आज की पोस्ट akbar birbal story in hindi में हम आपके साथ लाये है अकबर बीरबल की बेहतरीन कहानियां, जो आपको गुदगुदाने के साथ-साथ प्रेरित भी करेंगी। दोस्तों हम सभी अकबर-बीरबल की कहानियों से परिचित है। अकबर बीरबल की कहांनियां हमेशा से ही हम सभी के लिये प्रेरणादायक रही हॅैं। हमारी कहानियों में आप पढ़ेंगे ऐसे ही मजेदार किस्से जो आपको प्रेरित करेंगे।

Akbar birbal story in hindi | अकबर का साला

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अकबर का साला हमेशा से ही बीरबल की जगह लेना चाहता था। अकबर जानते थे कि बीरबल की जगह ले सके ऐसा बुद्धिमान इस संसार में कोई नहीं है। फिर भी जोरू के भाई को वह सीधी ‘ना’ नहीं बोल सकते थे। ऐसा कर के वह अपनी लाडली बेगम की बेरुखी मोल नहीं लेना चाहते थे। इसीलिए उन्होने अपने साले साहब को एक कोयले से भरी बोरी दे दी और कहा कि-जाओ और इसे हमारे राज्य के सबसे मक्कार और लालची सेठ – सेठ दमड़ीलाल को बेचकर दिखाओ , अगर तुम यह काम कर गए तो तुम्हें बीरबल की जगह वज़ीर बना दूंगा।

अकबर की इस अजीब शर्त को सुन कर साला अचंभे में पड़ गया। वह कोयले की बोरी ले कर चला तो गया। पर उसे पता था कि वह सेठ किसी की बातो में नहीं आने वाला ऊपर से वह उल्टा उसे ही चूना लगा देगा। हुआ भी यही सेठ दमड़ीलाल ने कोयले की बोरी के बदले एक ढेला भी देने से इनकार कर दिया। साला अपना सा मुंह लेकर महल वापस लौट आया और अपनी हार स्वीकार कर ली अब अकबर ने वही काम बीरबल को करने को कहा।

बीरबल कुछ सोचे और फिर बोले कि सेठ दमड़ीलाल जैसे मक्कार और लालची सेठ को यह कोयले की बोरी क्या मैं सिर्फ कोयले का एक टुकड़ा ही दस हज़ार रूपये में बेच आऊंगा। यह बोल कर वह तुरंत वहाँ से रवाना हो गए। सबसे पहले उसने एक दरज़ी के पास जा कर एक मखमली कुर्ता सिलवाया। हीरे-मोती वाली मालाएँ गले में डाली। महंगी जूती पहनी और कोयले को बारीक सुरमे जैसा पिसवा लिया।

फिर उसने पिसे कोयले को एक सुरमे की छोटी चमकदार डिब्बी में भर लिया। इसके बाद बीरबल ने अपना भेष बदल लिया और एक मेहमानघर में रुक कर इश्तिहार दे दिया कि बगदाद से बड़े शेख आए हैं। जो करिश्माई सुरमा बेचते हैं। जिसे आँखों में लगाने से मरे हुए पूर्वज दिख जाते हैं और यदि उन्होंने कहीं कोई धन गाड़ा है तो
उसका पता बताते हैं। यह बात शहर में आग की तरह फ़ैली।

सेठ दमड़ीलाल को भी ये बात पता चली। उसने सोचा ज़रूर उसके पूर्वजों ने कहीं न कहीं धन गाड़ा होगा। उसने तुरंत शेख बने बीरबल से सम्पर्क किया और सुरमे की डिब्बी खरीदने की पेशकश की। शेख ने डिब्बी के 20 हज़ार रुपये मांगे और मोल-भाव करते-करते 10 हज़ार में बात तय हुई। पर सेठ भी होशियार था, उसने कहा मैं अभी तुरंत ये सुरमा लगाऊंगा और अगर मुझे मेरे पूर्वज नहीं दिखे तो मैं पैसे वापस ले लूँगा। बीरबल बोला, बिलकुल आप ऐसा कर सकते हैं, चलिए शहर के चौराहे पर चलिए और वहां इसे जांच लीजिये।”सुरमे का चमत्कार देखने के लिए भीड़ इकठ्ठा हो गयी।

तब बीरबल ने ऊँची आवाज़ में कहा, ये सेठ अभी ये चमत्कारी सुरमा लगायेंगे और अगर ये उन्ही की औलाद हैं जिन्हें ये अपना माँ-बाप समझते हैं तो इन्हें इनके पूर्वज दिखाई देंगे और गड़े धन के बारे में बताएँगे। लेकिन अगर आपके माँ-बाप में से किसी ने भी बेईमानी की होगी और आप उनकी असल औलाद नहीं होंगे तो आपको कुछ भी नहीं दिखेगा। और ऐसा कहते ही बीरबल ने सेठ की आँखों में सुरमा लगा दिया। फिर क्या था, सिर खुजाते हुए सेठ ने आँखें खोली।

अब दिखना तो कुछ था नहीं, पर सेठ करे भी तो क्या करे!अपनी इज्ज़त बचाने के लिए सेठ ने दस हज़ार बीरबल के हाथ थमा दिये। और मुंह फुलाते हुए आगे बढ़ गए।बीरबल फ़ौरन अकबर के पास पहुंचे और रुपये थमाते हुए सारी कहानी सुना दी अकबर का साला बिना कुछ कहे अपने घर लौट गया। और अकबर-बीरबल एक दूसरे को देख कर मंद-मंद मुसकाने लगे। इस किस्से के बाद फिर कभी अकबर के साले ने बीरबल का स्थान नहीं माँगा ।।

कहानी से सीख -: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी भी काम को करने के लिये बल के साथ-साथ बुद्धि का भी प्रयोग करना आवश्यक है।

Birbal ki kichadi | बीरबल की खिचड़ी 

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सर्दीयो के दिन थे । बहुत ही ज्यादा ठण्ड थी । उस समय अकबर बादशाह और बीरबल अपने महल के बगीचे में घूमने निकले थे । अकबर ने बीरबल से कहा की इस ठण्ड में अगर हम किसी को मुँह मांगी धनराशि देंगे फिर भी कोई इस ठन्डे पानी के तालाब में पूरी रात खड़े नहीं रह पायेगा । बीरबल ने कहा की पैसो के लिए कोई भी ये काम करने के लिए तैयार हो जाएगा । अकबर ने कहा की अगर किसी ने ऐसा किया तो में उसे मुँह मांगा इनाम दुगा ।

अकबर ने बीरबल को ऐसा आदमी ढूढ़ने का काम दिया था । बीरबल ने शहर के एक गरीब आदमी को इस तालाब में पूरी रात खड़े रहने के लिए तैयार किया । इस आदमी को पैसे की जरूरत थी इस वजह से वो तैयार हो गया । वो आदमी उस तालाब के ठन्डे पानी में गया । पूरी रात वो ठन्डे पानी में खड़ा रहा । अकबर ने वो आदमी रात में इस तालाब से बहार ना आ पाए इस लिए पूरा इंतजाम किया था ।

दूसरे दिन सुबह बादशाह खुद अपने साथियो के साथ इस तालाब के पास आते है । उन्होंने देखा तो वो आदमी अभी भी इस तालाब के ठन्डे पानी में खड़ा था । वो आदमी बहार आया और उसने अकबर बादशाह के पैर छुए । बादशाह ने कहा की तुम इतनी ठण्ड में भी कैसे इस तालाब के ठन्डे पानी में पूरी रात खड़े रह पाए । वो आदमी बोला की ठण्ड तो मुझे भी बहुत लगती थी पर आपके महल की छत पर जलते हुए दिपक को देखकर मेने पूरी रात बितायी।

ये सुनकर बादशाह बोले की इसका मतलब यह हुआ की तुम उस दिपक की गर्मी मिलने के कारण ही पूरी रात इस तालाब में रह पाए । में तुम्हे अब कोई भी इनाम नहीं दूंगा । वो आदमी रोता हुआ बीरबल के पास गया और उसने बीरबल को पूरी बात बताई । उसने बीरबल को निवेदन भी किया की उसे न्याय दिलाये ।

दूसरे दिन बीरबल दरबार में नहीं गए । बादशाह ने बीरबल को बुलाने के लिए अपने सिपाही को भेजा । सिपाही ने आकर बादशाह को बोला की बीरबल साहब खिचड़ी पका रहे है । बीरबल की खिचड़ी पक जाने के बाद ही वे दरबार में आएंगे । काफी देर हो गयी फिर भी बीरबल दरबार में नहीं गए । उस वजह से अकबर खुद अपने सिपाही के साथ बीरबल के घर पहुंचे । वहा जाकर अकबर ने देखा की तीन लंबे बांसों के उपर एक हंडियां में चावंल डालकर उसे लटकाया गया था । नीचे जमीन पर आग जल रही है।

ये सब देखकर अकबर ने बीरबल को कहा की ये तुम क्या कर रहे हो ? तुम्हारा दिमाग ठिकाने पर नहीं है । इतनी दूर रखी हंडिया में खिचडी कैसे पक जाएगी ?

बीरबल ने कहा की जरूर पक जाएगी । अकबर ने कहा कैसे ? बीरबल ने कहा जैसे महल के उपर जल रहे दिपक की गर्मी के कारण वो आदमी पूरी रात तालाब के पानी में खड़ा रहा वैसे ।

सोचिये जैसे वो आदमी को इतनी दूर जल रहे दिपक की गर्मी मिली और वो पूरी रात उस ठन्डे पानी के तालाब में रह पाया तो फिर मेरी यह खिचडी क्यों नहीं पकेगी ? जहापनाह जरूर पकेगी ।

बीरबल की खिचड़ी पकने की तकनीक से अकबर को सब कुछ पता चल गया । अकबर ने बीरबल को बोला की उस आदमी को कल सुबह दरबार में भेजना में उसको मुँह मांगी धनराशि देने के लिए तैयार हु । सुबह होते ही वो आदमी बादशाह अकबर के पास गया और अपनी धनराशि प्राप्त की ।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि राजा को कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करना चाहिये।

New akbar birbal story in hindi | स्वर्ग की यात्रा

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जब से बीरबल बादशाह अकबर के दरबार में शामिल हुआ था, तब से अकबर के दरबार के कुछ मंत्री खुश नहीं थे। अकबर ने बीरबल का पक्ष अधिक लेना शुरू कर दिया था। इस बात ने मंत्रियों को बीरबल से  ईर्ष्या करने वाला बना दिया। उन्होंने शाही नाई की मदद लेने का निश्चय किय

नाई एक गरीब व्यक्ति था। वह मंत्रियों की इस बुरी योजना में शामिल नहीं होना चाहता था किन्तु उनके द्वारा दिए गए सोने के सिक्कों के कारण वह उनका विरोध नहीं कर सका। इसलिए वह मदद के लिए राजी हो गया। एक दिन जब वह अकबर के बाल काट रहा था

तो उसने कहा, ”जहांपनाह! कल रात मैंने एक सपना देखा। आपके पिता मेरे सपने में आये और बोले की वह स्वर्ग में आराम से हैं। उन्होंने आपको चिन्ता न करने को कहा।“ अकबर ने जब यह सुना तो वे उदास हो गये। क्योंकि जब उनके पिता मरे थे, तब वे बहुत छोटे थे। वे अपने पिता को बहुत ज्यादा याद करते थे।

वह बोले, ”मेरे पिता ने और क्या कहा? मुझे सब कुछ बताओ।“ नाई ने कहा, ”जहांपनाह! उन्होंने कहा कि वह ठीक हैं किंतु थोड़ा बहुत ऊब गए हैं। वह बोले, यदि आप बीरबल को वहां भेज देंगे तो वह उन्हें बहुत खुश रखेगा। वह स्वर्ग से बीरबल को देखते हैं और उसकी बुद्धि और हास्य की प्रशंसा करते हैं।

अकबर ने बीरबल से कहा, प्रिय बीरबल! मैं तुम से बहुत खुश हूं। किंतु अपने पिता के पास तुम्हें भेजते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है, जो स्वर्ग में खुश नहीं हैं, वे तुम्हें अपने पास बुलाना चाहते हैं। तुम्हें स्वर्ग में जाना होगा और उनका मनोंरजन करना होगा।

बीरबल ने यह सुना, तो वह चौंक गया। बाद में उसे पता चला कि यह मंत्रियों और नाई द्वारा बनाई गई योजना थी। उसने अपने घर के बाहर एक कब्र खुदवाई और कब्र के साथ एक सुरंग खोदी, जो उसके शयनकक्ष तक जाती थी। फिर वह अकबर के पास गया और बोला, मैं स्वर्ग जाने के लिए तैयार हूं। किन्तु हमारे परिवार की परम्परा है कि हमें अपने घर के बाहर दफन किया जाता है। मैंने पहले से ही कब्र की व्यवस्था कर ली है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि मुझे वहां जिंदा दफन कर दिया जाए।

अकबर ने बीरबल की इच्छा पूरी की। बीरबल को जिंदा दफन कर दिया गया। बीरबल सुरंग के रास्ते से अपने घर आ गया। तीन सप्ताह बाद वह अकबर के दरबार में गया। हर कोई बीरबल को देख कर हैरान था। अकबर ने कहा, तुम स्वर्ग से वापस कब आए? मेरे पिताजी कैसे हैं? और तुम इतने भद्दे क्यों दिख रहे हो?

बीरबल बोला, महाराज आपके पिता जी ठीक हैं। उन्होनें आपको अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं। किंतु जहांपनाह, स्वर्ग में कोई नाई नहीं है। इस वजह से मैं बहुत भद्दा दिख रहा हूं। यदि आपकी कृपा हो तो शाही नाई को आपके पिता जी के पास भेजा जाए जिससे उन्हें ख़ुशी मिलेगी।

सम्राट ने तुरंत आदेश दिया कि नाई को जिंदा दफन करके स्वर्ग भेजा जाए नाई के पैरों में गिर गया और क्षमा मांगने लगा। इसके बाद उसने सब कसूर कबूल कर लिया।अकबर ने यह योजना बनाने वाले सभी मंत्रियों को निकाल दिया और नाई को दस कोड़े मारने का दंड दिया।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जो दूसरों के लिये बुरा सोचेगा उसके साथ भी बुरा ही होगा अर्थात जैसी करनी वैसी भरनी।

Akbar birbal ki kahani | मोम का शेर

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सर्दियों के दिन थे, अकबर का दरबार लगा हुआ था। तभी फारस के राजा का भेजा एक दूत दरबार में उपस्थित हुआ।राजा को नीचा दिखाने के लिए फारस के राजा ने मोम से बना शेर का एक पुतला बनवाया था और उसे पिंजरे में बंद कर के दूत के हाथों अकबर को भिजवाया, और उन्हे चुनौती दी की इस शेर को पिंजरा खोले बिना बाहर निकाल कर दिखाएं।

बीरबल की अनुपस्थिति के कारण अकबर सोच पड़ गए की अब इस समस्या को कैसे सुलझाया जाए। अकबर ने सोचा कि अगर दी हुई चुनौती पार नहीं की गयी तो जग हसायी होगी। इतने में ही परम चतुर, ज्ञान गुणवान बीरबल आ गए। और उन्होने मामला हाथ में ले लिया।

बीरबल ने एक गरम सरिया मंगवाया और पिंजरे में कैद  मोम के शेर को पिंजरे में ही पिघला डाला। देखते-देखते मोम  पिघल कर बाहर निकल गया । अकबर अपने सलाहकार बीरबल की इस चतुराई से काफी प्रसन्न हुए और फारस के राजा ने फिर कभी अकबर को चुनौती नहीं दी।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अक्लमंदी से सबकुछ संभव है। हर जगह बल नहीं बुद्धि का प्रयोग किया जाना चाहिये।

Birbal ki kahani | बीरबल ने पहचानी अजनबी की मातृभाषा

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एक बार एक अजनबी व्यक्ति बादशाह अकबर (Akbar) के दरबार में आया और बादशाह के सम्मान में झुककर उसने कहा, ”जहांपनाह ! मैं बहुत सारी भाषाओं में बात कर लेता हूं। मैं आपकी बहुत अच्छी सेवा कर सकता हूं, यदि आप मुझे अपने दरबार में मंत्रियों में शामिल कर लें।

बादशाह ने उस व्यक्ति की परीक्षा लेने का निश्चय किया। उसने अपने मंत्रियों को उस आदमी से विभिन्न भाषाओं में बात करने को कहा। अकबर (Akbar) के दरबार में अलग-अलग राज्यों के लोग रहते थे। हर किसी ने उससे अलग-अलग भाषा में बात की। प्रत्येक मंत्री जो आगे आकर उससे अपनी भाषा में बात करता, वह व्यक्ति उसी भाषा में उत्तर देता था। सारे दरबारी उस व्यक्ति की भाषा कौशल की तारीफ करने लगे।

अकबर उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने उसे अपना मंत्री बनने की पेशकश की। किन्तु व्यक्ति ने कहा, ”मेरे मालिक! मैंने आज कई भाषाओं में बात की। क्या आपके दरबार में कोई है, जो मेरी मातृभाषा बता सके।“

कई मंत्रियों ने उसकी मातृभाषा बताने की कोशिश की, परंतु असफल रहे। वह व्यक्ति मंत्रियों पर हंसने लगा। उसने कहा, ”मैंने यहां के बारे में सुना है कि इस राज्य में बुद्धिमान मंत्री रहते हैं। किंतु मुझे लगता है कि मैंने गलत सुना है।“ अकबर को बहुत शर्मिदंगी हुई। वह बीरबल की ओर सहायता के लिए देखने लगा। उसने बीरबल से कहा, ”कृप्या मुझे इस अपमान से बचाने के लिए कुछ करो।“

बीरबल ने उस व्यक्ति से कहा, ”मेरे दोस्त! आप थके लग रहे हैं। आपने निश्चय ही यहां दरबार तक आने में बहुत लंबा रास्ता तय किया है। कृप्या आज आप आराम करें। मैं कल सुबह आपके प्रश्न का जवाब दे दूंगा।“ वास्तव में व्यक्ति बहुत थका हुआ था। उसने बादशाह से जाने की आज्ञा ली और चल दिया। उसने स्वादिष्ट खाना खाया और शाही अतिथि कक्ष में आराम करने चला गया।

सभी मंत्रियों के जाने के बाद अकबर ने बीरबल से कहा, तुम इस व्यक्ति के प्रश्न का उत्तर कैसे दोगे? बीरबल (Birbal) ने कहा, जहांपनाह! चिंता नहीं करें। मेरे पास एक योजना है। उस रात जब महल में हर कोई गहरी नींद में सो रहा था, तब बीरबल ने काला कम्बल अपने चारों ओर लपेटा और चुपके से अजनबी व्यक्ति के कक्ष में गया। बीरबल ने घास की टहनी से व्यक्ति के कान में गुदगुदी की।

व्यक्ति तुरंत उठ गया। किंतु जब उसने अंधेरे में काले शरीर वाला देखा तो उसने सोचा कि वह भूत है। उसने उडि़या भाषा में चिल्लाना शुरू कर दिया, हे भगवान जगन्नाथ, मुझे बचाओ मुझ पर भूत ने हमला कर दिया है।

अचानक बादशाह ने अपने मंत्रियों सहित कक्ष में प्रवेश किया। बीरबल (Birbal) ने कम्बल को फ़र्श पर फेंक दिया और कमरे में प्रकाश कर दिया। उसने व्यक्ति से कहा तो तुम उड़ीसा निवासी हो और तुम्हारी मातृभाषा उडि़या है। मैं सही कह रहा हूं ना, व्यक्ति ने बीरबल से कहा कि वह सही है।

अकबर ने कहा, एक आदमी चाहे कितनी भी भाषाएं बोल ले लेकिन वह जब डरता है तो अपनी मातृभाषा में ही चिल्लाता है। बीरबल Birbal ने पहेली को हल कर दिया। अकबर ने उसकी चतुराई के लिए उसकी प्रशंसा की।

कहानी से सीख : एक व्यक्ति चाहे कितनी भी भाषाएं बोल ले लेकिन जब वह डरता है तो अपनी मातृभाषा में ही बोलता है।

Raja akbar ki khani | ईश्वर अच्छा ही करता है

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बीरबल एक ईमानदार तथा धर्म-प्रिय व्यक्ति था। वह प्रतिदिन ईश्वर की आराधना बिना-नागा किया करता था। इससे उसे नैतिक व मानसिक बल प्राप्त होता था। वह अक्सर कहा करता था कि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है, कभी-कभी हमें ऐसा लगता है

कि ईश्वर हम पर कृपादृष्टि नहीं रखता, लेकिन ऐसा होता नहीं। कभी-कभी तो उसके वरदान को भी लोग शाप समझने की भूल कर बैठते हैं। वह हमको थोड़ी पीड़ा इसलिए देता है ताकि बड़ी पीड़ा से बच सकें।

एक दरबारी को बीरबल की ऐसी बातें पसंद न आती थीं। एक दिन वही दरबारी दरबार में बीरबल को संबोधित करता हुआ बोला, देखो ईश्वर ने मेरे साथ क्या किया। कल शाम को जब मैं जानवरों के लिए चारा काट रहा था तो अचानक मेरी छोटी उंगली कट गई। क्या अब भी तुम यही कहोगे कि ईश्वर ने मेरे लिए यह अच्छा किया है ? कुछ देर चुप रहने के बाद बोला बीरबल मेरा अब भी यही विश्वास है क्योंकि ईश्वर जो कुछ भी करता है

मनुष्य के भले के लिए ही करता है। सुनकर वह दरबारी नाराज हो गया कि मेरी तो उंगली कट गई और बीरबल को इसमें भी अच्छाई नजर आ रही है। मेरी पीड़ा तो जैसे कुछ भी नहीं। कुछ अन्य दरबारियों ने भी उसके सुर में सुर मिलाया।

तभी बीच में हस्तक्षेप करते हुए बादशाह अकबर बोले, बीरबल हम भी अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, लेकिन यहां तुम्हारी बात से सहमत नहीं। इस दरबारी के मामले में ऐसी कोई बात नहीं दिखाई देती जिसके लिए उसकी तारीफ की जाए। बीरबल मुस्कराता हुआ बोला ठीक है

जहांपनाह, समय ही बताएगा अब। तीन महीने बीत चुके थे। वह दरबारी, जिसकी उंगली कट गई थी, घने जंगल में शिकार खेलने निकला हुआ था। एक हिरन का पीछा करते वह भटककर आदिवासियों के हाथों में जा पड़ा। वे आदिवासी अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि में विश्वास रखते थे। अतः वे उस दरबारी को पकड़कर मंदिर में ले गए बलि चढ़ाने के लिए। लेकिन जब पुजारी ने उसके शरीर का निरीक्षण किया तो हाथ की एक उंगली कम पाई।

नहीं, इस आदमी की बलि नहीं दी जा सकती। मंदिर का पुजारी बोला, ‘यदि नौ उंगलियों वाले इस आदमी को बलि चढ़ा दिया गया तो हमारे देवता बजाय प्रसन्न होने के क्रोधित हो जाएंगे अधूरी बलि उन्हें पसंद नहीं। हमें महामारियों, बाढ़ या सूखे का प्रकोप झेलना पड़ सकता है। इसलिए इसे छोड़ देना ही ठीक होगा। और उस दरबारी को मुक्त कर दिया गया।अगले दिन वह दरबारी दरबार में बीरबल के पास आकर रोने लगा।

तभी बादशाह भी दरबार में आ पहुंचे और उस दरबारी को बीरबल के सामने रोता देखकर हैरान रह गए।‘‘तुम्हें क्या हुआ, रो क्यों रहे हो ? अकबर ने सवाल किया। जवाब में उस दरबारी ने अपनी आपबीती विस्तार से कह सुनाई। वह बोला, अब मुझे विश्वास हो गया है कि ईश्वर जो कुछ भी करता है मनुष्य के भले के लिए ही करता है। यदि मेरी उंगली न कटी होती तो निश्चित ही आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसीलिए मैं रो रहा हूं लेकिन ये आंसू खुशी के हैं।

मैं खुश हूं क्योंकि मैं जिन्दा हूं। बीरबल के ईश्वर पर विश्वास को संदेह की दृष्टि से देखना मेरी भूल थी। अकबर ने मंद-मंद मुस्कराते हुए दरबारियों की ओर देखा जो सिर झुकाए चुपचाप खड़े थे। अकबर को गर्व महसूस हो रहा था कि बीरबल जैसा बुद्धिमान उसके दरबारियों में से एक है।

कहानी से सीख -: इस कहानी से यह सीख मिलती है कि ईश्वर जो कुछ भी करते हैं मनुष्यों की भलाई के लिये ही करते हैं।

Akbar aur birbal ki kahani | बीरबल और चोर की कहानी

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एक बार राजा अकबर के प्रदेश में चोरी हई। इस चोरी में एक चोर नें एक व्यापारी के घर से बहुत ही कीमती सामान चुरा लिया था। उस व्यापारी को इस बात पर तो पूरा विश्वास था कि चोर उसी के 10 नौकरों में से कोई एक था पर वह यह नहीं जानता था की वह कौन है। यह जानने के लिए की चोर कौन है !

वह व्यापारी बीरबल के पास गया और उसने बीरबल से मदद मांगी। बीरबल नें भी इस बात पर हाँ कर दिया और अपने सिपाहियों से कहा कि सभी 10 नौकरों को जेल में डाल दिया जाये। यह सुनते ही उसी दिन सिपाहियों द्वारा सभी नौकरों को पकड़ लिया गया।

बीरबल नें सबसे पुछा कि चोरी किसने किया है परन्तु किसी नें भी यह मानने को इंकार कर दिया की चोरी उसने किया है। बीरबल नें थोड़ी देर सोचा, और कुछ देर बाद वह दस समान लम्बाई की छड़ी ले कर आये और सभी चुने हुए लोगों को एक-एक छड़ी पकड़ा दिया। पर छड़ी पकडाते हुए बीरबल नें एक बात कहा !

उस इंसान की छड़ी 2 इंच बड़ी हो जाएगी जिस व्यक्ति नें यह चोरी की है। यह कह कर बीरबल चले गए और अपने सिपाहियों को निर्देश दिया की सुबह तक उनमें से किसी भी व्यक्ति को छोड़ा ना जाये। जब बीरबल नें सुबह सभी नौकरों की छड़ी को ध्यान से देखा तो पता चला उनमें से एक नौकर की छड़ी 2 इंच छोटी थी।

यह देखते ही बीरबल ने कहा ! यही है चोर बाद में यह देख-कर उस व्यापारी नें बीरबल से प्रश्न किया कि कैसे उन्हें पता चला की चोर वही है। बीरबल नें कहा कि चोर नें अपने छड़ी के 2 इंच बड़े हो जाने के डर से रात के समय ही अपने छड़ी को 2 इंच छोटा कर दिया था।

कहानी से सीख -: इस कहानी से यह सीख मिलती है कि सत्य कभी नहीं छुपता इसलिये जीवन में कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिये।

Akbar birbal kahani in hindi | सड़क के मोड़

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एक बार फारस के राजा ने अकबर को एक अजीब सा पत्र भेजा। इस पत्र में उसने अकबर से पूछा, ”बताइये आपके राज्य में हर सड़क में कितने मोड़ हैं? अकबर इस सवाल से हैरान हो गया। उसका राज्य बड़े राज्यों में से एक था। अपने दरबार के मंत्रियों को भेजकर सड़क के मोड़ों की गिनती करवाना संभव नहीं था।

फिर भी सम्राट ने अपने प्रधानमंत्री टोडरमल को बुलाया और यह काम पूरा करने को कहा। टोडरमल ने बदले में अपने आदमियों को भेजकर राज्य में सड़कों के मोड़ों को गिन कर आने को कहा।

अगले दिन बीरबल ने देखा कि अकबर किसी चीज की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। बीरबल ने कहा, जहांपनाह! आप चिंतित दिख रहे हैं। क्या कुछ परेशानी है?

अकबर ने कहा, हां बीरबल! मैं टोडरमल की प्रतीक्षा कर रहा हूं। उसे मैंने अपने राज्य में सभी सड़कों के मोड़ गिन कर लाने को कहा है। फिर उन्होनें बीरबल को फारस के राजा द्वारा भेजे गए पत्र के बारे में बताया। बीरबल ने जैसे ही सारी बात सुनी, वैसे ही वह जोर से हंस पड़ा। बीरबल को हंसता हुआ देखकर अकबर हैरान हो गए।

बीरबल ने कहा, महाराज मैं आपको अपने राज्य की ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी शहर की सड़क के मोड़ों की सही संख्या बता सकता हूं।

अकबर की आंखें खुली की खुली रह गयीं। उसने कहा, मुझे उम्मीद है कि तुम मजाक नहीं कर रहे होगे। मैंने कई आदमियों को राज्य की सड़कों के मोड़ गिनने को भेजा है और तुम कह रहे हो कि तुम यह पहले से ही जानते हो?

बीरबल ने कहा, जहांपनाह! मैं कोई मजाक नहीं कर रहा। दुनिया की सड़कों के केवल दो ही मोड़ होते हैं। एक दायीं ओर और दूसरा बायीं ओर“ यह सुनकर सम्राट जोर से हंस पड़े। यह तो बहुत ही आसान सा जवाब था और मैंने इसके बारे में सोचा ही नहीं। उन्होनें बीरबल को सुन्दर से उपहार दिया और शाही कवि को फारस के राजा के पास इसका जवाब भेजने को कहा ।

कहानी से सीख -: इस कहानी से यह सीख मिलती है कि अगर दिमाग लगाकर कार्य किया जाए तो से बडी से बडी समस्या को हल किया जा सकता है

Akbar birbal ke kisse | कल आज और कल

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एक दिन बादशाह अकबर ने ऐलान किया कि जो भी मेरे सवालों का सही जवाब देगा उसे भारी ईनाम दिया जाएगा। सवाल कुछ इस प्रकार से थे-ऐसा क्या है जो आज भी है और कल भी रहेगा? ऐसा क्या है जो आज भी नहीं है और कल भी नहीं होगा ? ऐसा क्या है जो आज तो है लेकिन कल नहीं होगा ?

इन तीनों सवालों के उदाहरण भी देने थे। किसी को भी चतुराई भरे इन तीनों सवालों का जवाब नहीं सूझ रहा था। तभी बीरबल बोला, हुजूर ! आपके सवालों का जवाब मैं दे सकता हूं लेकिन इसके लिए आपको मेरे साथ शहर का दौरा करना होगा। तभी आपके सवाल सही ढंग से हल हो पाएंगे।’

अकबर और बीरबल ने वेश बदला और सूफियों का बाना पहनकर निकल पड़े। कुछ ही देर बाद वे बाजार में खड़े थे। फिर दोनों एक दुकान में घुस गए। बीरबल ने दुकानदार से कहा, हमें बच्चों की पढ़ाई के लिए मदरसा बनाना है, तुम हमें इसके लिए हजार रुपये दे दो। जब दुकानदार ने अपने मुनीम से कहा कि इन्हें एक हजार रुपये दे दो तो बीरबल बोला, जब मैं तुमसे रुपये ले रहा हूंगा तो तुम्हारे सिर पर जूता मारूंगा।

हर एक रुपये के पीछे एक जूता पड़ेगा। बोलो, तैयार हो ? यह सुनते ही दुकानदार के नौकर का पारा चढ़ गया और वह बीरबल से दो-दो हाथ करने आगे बढ़ आया। लेकिन दुकानदार ने नौकर को शांत करते हुए कहा, मैं तैयार हूँ, लेकिन मेरी एक शर्त है।

मुझे विश्वास दिलाना होगा कि मेरा पैसा इसी नेक काम पर खर्च होगा। ऐसा कहते हुए दुकानदार ने सिर झुका दिया और बीरबल से बोला कि जूता मारना शुरू करें। तब बीरबल व अकबर बिना कुछ कहे-सुने दुकान से बाहर निकल आए।

दोनों चुपचाप चले जा रहे थे कि तभी बीरबल ने मौन तोड़ा, बंदापरवर ! दुकान में जो कुछ हुआ उसका मतलब है कि दुकानदार के पास आज पैसा है और उस पैसे को नेक कामों में लगाने की नीयत भी जो उसे आने वाले कल (भविष्य) में नाम देगी। इसका एक मतलब यह भी है कि अपने नेक कामों से वह जन्नत में अपनी जगह पक्की कर लेगा। आप इसे यूं भी कह सकते हैं कि जो कुछ उसके पास आज है, कल भी उसके साथ होगा। यह आपके पहले सवाल का जवाब है।

फिर वे चलते हुए एक भिखारी के पास पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक आदमी उसे कुछ खाने को दे रहा है और वह खाने का सामान उस भिखारी की जरूरत से कहीं ज्यादा है। तब बीरबल उस भिखारी से बोला, हम भूखे हैं, कुछ हमें भी दे दो खाने को।

यह सुनकर भिखारी बरस पड़ा, भागो यहां से। जाने कहां से आ जाते हैं मांगने। तब बीरबल बादशाह से बोला, यह रहा हुजूर आपके दूसरे सवाल का जवाब। यह भिखारी ईश्वर को खुश करना नहीं जानता। इसका मतलब यह है कि जो कुछ इसके पास आज है वो कल नहीं होगा।

दोनों फिर आगे बढ़ गए। उन्होंने देखा कि एक तपस्वी पेड़ के नीचे तपस्या कर रहा है। बीरबल ने पास जाकर उसके सामने कुछ पैसे रखे। तब वह तपस्वी बोला, इसे हटाओ यहां से। मेरे लिए यह बेईमानी से पाया गया पैसा है। ऐसा पैसा मुझे नहीं चाहिए। अब बीरबल बोला, हुजूर ! इसका मतलब यह हुआ कि अभी तो नहीं है लेकिन बाद में हो सकता है। आज यह तपस्वी सभी सुखों को नकार रहा है।

लेकिन कल यही सब सुख इसके पास होंगे। और हुजूर ! चौथी मिसाल आप खुद हैं। पिछले जन्म में आपने शुभ कर्म किए थे जो यह जीवन आप शानो-शौकत के साथ बिता रहे हैं, किसी चीज की कोई कमी नहीं। यदि आपने इसी तरह ईमानदारी और न्यायप्रियता से राज करना जारी रखा तो कोई कारण नहीं कि यह सब कुछ कल भी आपके पास न हो। लेकिन यह न भूलें कि यदि आप राह भटक गए तो कुछ साथ नहीं रहेगा।

अपने सवालों के बुद्धिमत्तापूर्ण चतुराई भरे जवाब सुनकर बादशाह अकबर बेहद खुश हुए।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हम आज जो कार्य करते हैं उसका फल हमें अवश्य मिलता है चाहे वह कार्य अच्छा हो या बुरा।

Akbar birbal story | बीरबल और तीन गुडि़यां

akbar aur birbal ki kahani
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एक बार एक कलाकार तीन सुन्दर गुडि़यों को लेकर बादशाह अकबर के दरबार में आया। ये गुडि़यां बिल्कुल एक समान थी। उनमें इतनी समानता थी कि उनके बीच अंतर करना बहुत मुश्किल था। अकबर को गुडि़यां बहुत प्यारी लगी। उसने कहा, ये गुडि़यां मुझे बेच दो और मैं तुम्हें इनकी अच्छी कीमत दूंगा।

कलाकार ने कहा, जहांपनाह! ये गुडि़यां बेचने के लिए नहीं हैं। बेशक मैं आपको ये उपहार के रूप में दे दूंगा यदि आपके दरबार में कोई यह बता दे कि तीनों में से अच्छी कौन सी है। यह एक अजीब पहेली थी। अकबर ने गुडि़यों को उठाया और करीब से देखा। किंतु तीनों गुडि़यों में इतनी समानता थी कि अकबर  यह नहीं कह सका कि कौन सी अच्छी है। तब उसके प्रत्येक मंत्री ने इस पहेली को सुलझाने की कोशिश की, परंतु वे असफल रहे।

अकबर ने बीरबल को बुलाकर कहा, बीरबल तुम क्यों नहीं कोशिश करते। मुझे विश्वास है कि तुम इस पहेली को हल कर लोगे।“ बीरबल अकबर की ओर सम्मान से झुका और गुडि़यों के पास गया। उसने प्रत्येक गुडि़या को हाथ में उठाया और बड़ी बारीकी से उनको देखा। हर कोई आश्चर्यचकित था।

उसने एक गुडि़या के कान में फूंक मारी। हवा उसके दूसरे कान से बाहर आ गई। फिर उसने दूसरी गुडि़या के कान में फृंक मारी, किंतु इस बार हवा उसके मुंह से निकली। जब बीरबल ने तीसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी तो हवा कहीं से भी बाहर नहीं निकली।ने कहा, जहांपनाह! यह तीसरी गुडि़या ही इन तीनों में सबसे अच्छी है।

अकबर हैरान हो गया। उसने कहा, ”तुमने यह कैसे जान लिया? बीरबल ने कहा, मेरे मालिक! यह तीनों गुडि़यां तीन व्यक्तियों की तरह हैं। जब मैंने पहली गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो यह दूसरे कान से बाहर आ गई। ऐसे ही जब हम एक रहस्य किसी दूसरे व्यक्ति को बताते हैं

तो वह अगले ही पल उसे भूल जाता है।जब मैंने दूसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो वह उसके मुंह से बाहर निकल गयी। ऐसे ही कुछ व्यक्ति जो कुछ सुनते हैं, उसे शीघ्र ही दूसरे व्यक्ति को बता देते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी रहस्य को छुपाकर नहीं रख सकते।

किंतु जब तीसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो हवा कहीं से भी बाहर नहीं आई। इस तरह के व्यक्ति अच्छे होते हैं, जो रहस्य को छुपाकर रखते हैं। आप इन्हें कोई भी रहस्य की बात बता सकते हैं। कलाकार ने कहा, मैंने अभी तक केवल बीरबल के ज्ञान के बारे में सुना था, किन्तु आज मैंने इसे देख भी लिया। जहांपनाह, ये गुडि़यां आपकी हैं।“अकबर ने कहा उसे बीरबल पर बहुत गर्व है।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अपने रहस्य को हर किसी को नहीं बताना चाहिये अर्थात रहस्यों को छुपाकर रखना चाहिये।

Badshah ki kahani | व्यापारी और धोखेबाज़ मेजबान

akbar birbal kahani
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एक बार बादशाह अकबर के शहर में एक व्यक्ति रहता था। उसके जीने का तरीका अजीब था। वह लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसे कमाता था। एक बार वह बाजार में एक बहुत अमीर व्यापारी से मिला, जो बाहरी देश से आया हुआ था। वह इस शहर में नया था। इसलिए जब धोखेबाज ने उसे अपने घर रात के भोजन के लिए आमंत्रित किया, तो व्यापारी ने इस उम्मीद से आमंत्रण स्वीकार कर लिया कि इस नये शहर में उनके नये दोस्त बन जाएंगे।

उस रात उन्होंने लाजवाब खाना खाया और बहुत देर तक बातें की। फिर व्यापारी और मेजबान सोने के लिए बिस्तर पर चले गये। अगली सुबह धोखेबाज ने व्यापारी से कहा, ”मैंने रात को आपको खाने पर आमंत्रित किया और एक अच्छे मेजबान की भूमिका निभाई। इस बात के लिए आप मुझे कैसे भुगतान करेगें?

व्यापारी पूरी तरह भ्रमित था। उसने कहा, ”मैं नही जानता कि तुम किस बारे में बात कर रहे हो। धोखेबाज बोला, आपने मेरा हीरा चोरी कर लिया है। मैं उसे वापस चाहता हूं।“ व्यापारी ने कहा, ”मित्र मैं नहीं जानता कि तुम किस हीरे की बात कर रहे हो। मुझे बिल्कुल पता नहीं है।

उन दोनों में लड़ाई शुरू हो गई। आखिरकार वे दोनों इसके समाधान के लिए अदालत में जाने को तैयार हो गये। बादशाह अकबर दोनों की कहानी सुनकर हैरान हो गए। उन्होंने बीरबल को यह मामला सुलझाने को कहा।

धोखेबाज ने कहा, महाराज! मेरे पास गवाह है, जिसने व्यापारी को हीरा चोरी करते हुए देखा है। बीरबल ने कहा, अपने गवाहों को बुलाओ। मैं इस बारे में उनसे कुछ पूछना चाहूंगा। एक नाई और दर्जी धोखेबाज के गवाह थे। बीरबल ने दोनों को अलग-अलग कमरों में बैठा दिया।

फिर उन्हें मिट्टी का ढेर देकर हीरे के आकार के रूप में करने को कहा।नाई ने अपने जीवन में कभी हीरा नहीं देखा था। उसके पिता ने उसे बताया था कि नाई का हीरा उसका उस्तरा होता है। इसलिए उसने मिट्टी को उस्तरे की तरह आकार दे दिया।दर्जी की मां ने भी कहा था कि दर्जी का हीरा उसकी सुई होती है। इसलिए उसने मिट्टी को सूई की तरह आकार दे दिया।

जब बीरबल ने देखा कि दोनों गवाहों ने क्या बनाया है तो वह बोला, जहांपनाह! इन दोनों में से किसी ने भी हीरा नहीं देखा है। तो कैसे इन दोनों ने व्यापारी को हीरा चोरी करते हुए देखा है। यह कहानी झूठी है। व्यापारी निर्दोष है। यह साबित होता है

कि धोखेबाज ने नाई और दर्जी को झूठे गवाह बनने के लिए रिश्वत दी है। व्यापारी ख़ुशी से वापिस अपने घर चला गया, जबकि धोखेबाज को कैद खाने में डाल दिया गया।

कहानी से सीख -: इस कहानी से यह सीख मिलती है कि किसी को भी धोखा देना या बेवकूफ बनना गलत है कयोकि एक दिन उसका दण्ड अवश्य मिलता है

Akbar birbal kahani | अकबर-बीरबल और सबसे खूबसूरत बच्चा

akbar birbal ke kisse
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एक बार बादशाह अकबर अपने शहजादे के साथ दरबार में पहुंचे उनका शहज़ादा उनकी गोद में खेल रहा था जिसे देख दरबार में मौजूद हर कोई कह रहा था कि शहजादा दुनिया का सबसे खूबसूरत बच्चा है सभी की बात सुनकर बादशाह अकबर ने भी कहा कि उनका शहजादा दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा है. अकबर की इस बात पर सभी हामी भरते हैं, सिवा बीरबल के तभी अकबर बीरबल से पूछते हैं कि तुम्हारा इस बारे में क्या कहना है, तुम चुप क्यों हो?

बीरबल: जहांपनाह शहजादा सुंदर है, लेकिन मेरे ख्याल से वो पूरी दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा नहीं है

अकबर: तो तुम्हारे कहने का क्या मतलब है कि शहजादा सुंदर नहीं है?

बीरबल: महाराज, मेरा कहने का मतलब ये नहीं कि शहज़ादा सुंदर नहीं, लेकिन दुनिया में और भी सुंदर बच्चे होंगे.

अकबर: बीरबल अगर ऐसी बात है तो तुम उसे हमारे समक्ष लेकर आओ, जो दुनिया में सबसे सुंदर बच्चा है.

बादशाह की बात सुनकर बीरबल कुछ दिन तक बच्चे की खोज करके दरबार में आते हैं. बीरबल को दरबार में अकेले देख अकबर खुश होकर कहते हैं, तुम अकेले क्यों आए हो, क्या इसका ये मतलब है कि तुम्हें शहजादे से ज़्यादा खूबसूरत बच्चा नहीं मिला? यही सच है ना?

बीरबल: जहांपनाह, मैंने सबसे सुंदर बच्चा खोज लिया है.

अकबर: अगर बच्चा मिल गया है, तो तुम उसे दरबार में क्यों नहीं लाए?

बीरबल: महाराज, मैं उसे दरबार में लेकर नहीं आ सकता, पर मैं आपको उस तक लेकर जा सकता हूं. लेकिन हमें वेष बदलना होगा.

अकबर: ठीक है, जब तुम इतने आश्वस्त हो तो हम कल सुबह वेष बदलकर उस बच्चे को देखने जाएंगे.

अगले दिन सुबह बीरबल बादशाह अकबर को एक झोपड़ी के पास लेकर जाता है, जहां एक छोटा-सा बच्चा मिट्टी में खेल रहा होता है.

बीरबल: जहांपनाह वो रहा सबसे सुंदर बच्चा.

अकबर: बीरबल, तुम्हारी यह हिम्मत कि तुमने एक बदसूरत और झोपड़ी में रहने वाले बच्चे को संसार का सबसे सुंदर बच्चा बता दिया. इस बदसूरत बच्चे का हमारे शहज़ादे से क्या मुक़ाबला?

बादशाह की बातें सुनकर बच्चा जोर-जोर से रोने लगता है, जिसे सुनकर उसकी मां झोपड़ी से आती है और गुस्से में कहती है, तुम लोगों की इतनी हिम्मत? मेरे बच्चे को बदसूरत कैसे कह दिया? मेरा बच्चा दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा है. अगर दोबारा मेरे बच्चे को बदसूरत कहा, तो मैं तुम दोनों की हड्डी-पसली एक कर दूंगी

उसके बाद वो मां अपने बच्चे को चुप कराकर खिलाने लगती है और कहती है, मेरा राजा बेटा… मेरा बच्चा दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा है. मेरा बेटा सबसे प्यारा और सुंदर है.

बीरबल: महाराज अब आपको सब समझ में आ गया होगा कि मैं क्या कहना चाहता था

अकबर: बीरबल मैं अच्छे से समझ गया हूं कि तुम्हारा क्या मतलब था

बीरबल: महाराज, हर बच्चा उनके माता-पिता के लिए दुनिया का का सबसे सुंदर बच्चा ही होता है जहांपनाह, मैं बस इतना चाहता हूं कि आप शहजादे को अच्छी तालीम दें और उन्हें चापलूसों से दूर रखें

अकबर: बीरबल, तुम वाक़ई मेरे सच्चे मित्र और हितैषी हो, तुमने बेबाक़ होकर बिना डरे सच कहा और मेरी आंखें खोल दीं. तुमने फिर साबित कर दिया कि तुम वफ़ादार हो और हमारा व राज्य का भला चाहते हो !!

कहानी से सीख -: इस कहानी से यही सीख मिलती है कि चापलूसों से बचकर रहना चाहिये और सच बोलने वालों पर भरोसा करना चाहिये। इसके अलावा कभी अपने ओहदे या किसी चीज पर घमंड नहीं करना चाहिये।

Akbar birbal stories in hindi | बीरबल और अंगूठी चोर की कहानी

akbar birbal ki kahani 1
akbar birbal story in hindi

एक दिन भरे दरबार में राजा अकबर नें अपना अंगूठी खो दिया। जैसे ही राजा को यह बात पता चली उन्होंने सिपाहियों से ढूँढने को कहा पर वह नहीं मिला।

राजा अकबर नें बीरबल से दुखी मन से बताया कि वह अंगूठी उनके पिता की अमानत थी जिससे वह बहुत ही प्यार करते थे। बीरबल नें जवाब में कहा! आप चिंता ना करें महाराज, मैं अंगूठी ढून्ढ लूँगा।

बीरबल नें दरबार में बैठे लोगों की तरफ देखा और राजा अकबर से कहा !  महाराज चोरी इन्हीं दर्बर्यों में से ही किसी ने किया है। जिसके दाढ़ी में तिनका फसा है उसी के पास आपका अंगूठी हैा।

जिस दरबारी के पास महाराज का अंगूठी था वह चौंक गया और अचानक से घबराहट के मारे अपनी दाढ़ी को धयान से देखने लगा। बीरबल नें उसकी हरकत को देख लिया और उसी वक्त सैनिकों को आदेश दिया और कहा! इस आदमी की जांच किया जाए।

बीरबल सही था अंगूठी उसी के पास थी। उसको पकड़ लिया गया और कारागार में कैद कर लिया गया। राजा अकबर बहुत खुश हुए।

कहानी से सीख -: इस कहानी से यह सीख मिलती है कि एक दोषी व्यक्ति हमेशा डरता रहता है चोर की दाढी मे तिनका ।

Akbar birbal stories | भगवान से महान

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एक दिन बादशाह अकबर ने अपने कुछ खास मित्रों को दावत के लिए आमंत्रित किया। बीरबल भी वहां थे। कई प्रकार के लजीज व्यंजन परोसे गए थे और सभी ने दावत का लुत्फ लिया। रात के खाने के बाद मेहमानों ने मनोरंजन के लिए अनुरोध किया। एक प्रसिद्ध कहानीकार को बुलाया गया। उसने अपने हास्य की कहानियां सुनानी शुरू कर दी। अकबर और उनके मेहमान कहानियों पर दिल खोलकर हंसने लगे।

अकबर उस कहानीकार से बहुत खुश हुए और उसने कहानीकार को सोने के सिक्कों की थैली भेंट की। वास्तव में, बादशाह को कहानियां सुनने में बहुत अधिक रूचि थी और वह कहानीकार कहानी सुनाने में निपुण था।

उसने बादशाह से सोने के सिक्कों की थैली ले ली और आदरपूर्वक उनके सामने झुककर अभिवादन किया। उसने कहा, ”आप सभी राजाओं में सबसे महान हैं। वास्तव में आप ईश्वर से भी महान हैं।“

जैसे ही कहानीकार ने यह बात कही, दरबार में सन्नाटा छा गया। मंत्रियों ने सोचा, ”ईश्वर से महान? एक इंसान ईश्वर से महान कैसे हो सकता है?“ कहानीकार ने जो कुछ भी कहा, उसे सुनकर अकबर बहुत खुश हुआ। हालांकि वह जानता था कि कहानीकार प्रशंसा के साथ कुछ ज्यादा ही बोल गया, पर अपने आसपास के चेहरों को हैरान देखकर हंसने लगा। उसने कुछ मजा लेने का सोचा।

जब कहानीकार चला गया, तब बादशाह अपने मेहमानों और मंत्रियों की तरफ मुड़ा और बोला, ”उस आदमी ने जो कुछ भी कहा है, क्या आप सभी उससे सहमत हैं, क्या आपको लगता है कि मैं ईश्वर से महान हूं?“

मेहमान और मंत्री शांत थे। वे नहीं जानते थे कि क्या उत्तर दें। निश्चित रूप से, बादशाह भगवान से बड़े नहीं थे। लेकिन यह सब कुछ कहने पर बादशाह का अपमान होता और वह उन्हें सजा दे सकते थेे। अकबर उन्हें चिढ़ा रहे थे। उन्होंने कहा, ”मैं बहुत खुश हूं कि आप मुझे भगवान से भी बड़ा मानते हैं। अब मुझे यह बताओ कि मैं भगवान से महान क्यों हूं?“

मेहमानों और मंत्रियों ने एक दूसरे की तरफ देखा। वह पूरी तरह से निरूत्तर थे। अकबर ने बीरबल की तरफ देखकर कहा, ”बीरबल बताओ मुझे, तुम्हें मैं भगवान से बड़ा क्यों लगता हूं?“

बीरबल ने कहा, ”जहांपनाह! आप कुछ ऐसा कर सकते हैं जो भगवान भी नहीं कर सकते। आप अपने राज्य से दुष्ट आदमी को निर्वासित कर सकते हैं। भगवान ऐसा नहीं कर सकते हैं।“ हालांकि वह ब्रहांड के मालिक हैं, परन्तु क्या वह इंसान को कहीं और भेज सकते हैं? इसलिए आप भगवान से भी महान हैं।

अकबर की हंसी छूट गयी। उन्होंने इस तरह के एक जवाब के बारे में सोचा भी नहीं था। उन्होंने कहा, ”प्रिय बीरबल, आपकी बुद्धि का कोई मुकाबला नहीं है।“ मेहमानों और मंत्रियों ने राहत की सांस ली। वह सभी बीरबल के जवाब पर हंसने लगे।

कहानी से सीख -: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कोई भी इसांन भगवान से महान कभी नही हो सकता है

Akbar birbal ki kahani in hindi | कुएं का पानी

Akbar Birbal Stories In Hindi
akbar birbal story in hindi

एक किसान बहुत परेशान था। उसे अपने खेतों को सींचने के लिए पानी की जरूरत थी। इसलिए, वह कई दिनों से अपनी जमीन के आसपास किसी कुएं की तलाश कर रहा था। इसी तलाश में वह घूम ही रहा था कि अचानक उसे एक कुआं दिखा। यह कुआं उसके खेतों से बहुत नजदीक था। इसलिए, किसान बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि अब उसकी परेशानी खत्म हो गई। यह सोचकर वह खुशी-खुशी घर चला गया।

अगले दिन वह पानी लेने कुएं पर पहुंचा। जैसे ही उसने कुएं के नजदीक रखी बाल्टी कुएं में डाली, वहां एक आदमी आ धमका। वह किसान से बोला, यह कुआं मेरा है। तुम इससे पानी नहीं ले सकते। अगर तुम इस कुएं से पानी लेना चाहते हो, तो तुम्हें इस कुएं को खरीदना होगा।

यह बात सुनकर किसान कुछ देर रुका और फिर मन ही मन सोचने लगा कि अगर मैं इस कुएं को खरीद लूं, तो मुझे कभी पानी की कमी नहीं होगी और न ही मुझे पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ेगा। फिर क्या था, दोनों के बीच एक रकम तय हुई।

किसान के पास उतने पैसे तो थे नहीं, लेकिन वह यह मौका छोड़ना नहीं चाहता था। इसलिए, किसान ने उस आदमी को अगले दिन वह रकम देने का वादा किया और घर की ओर चल दिया।

किसान के लिए कुआं खरीदने का यह अच्छा मौका था। इसलिए, वह इस काम में जरा भी देर नहीं करना चाहता था। घर पहुंचते ही उसने अपने करीबियों और दोस्तों से इस बारे में बात की और कुएं के लिए तय हुई रकम का इंतजाम करने में जुट गया।

थोड़ी भागदौड़ और कोशिश के बाद आखिरकार उसने वह रकम जमा कर ली। अब वह पूरी तरह से निश्चिंत हो चुका था कि उसे कुआं खरीदने से कोई नहीं रोक सकता।

जमा हुए पैसों को लेकर वह फिर घर चल दिया। उसे बड़ी बेसब्री से इंतजार था कि कब रात खत्म होगी और वह कुआं खरीदने जाएगा। इसी सोच में वह पूरी रात सो नहीं सका। अगले दिन सुबह होते ही वह कुआं खरीदने निकल पड़ा।

उस आदमी के घर पहुंच किसान ने उसके हाथ पर पैसे रखे और कुएं को खरीद लिया। अब तो कुआं किसान का हो गया था तो फिर उसने पानी निकालने में देर नहीं की। जैसे ही किसान ने कुएं से पानी निकालने के लिए बाल्टी उठाई, उस आदमी ने फिर बोला ठहरो, तुम इस कुएं से पानी नहीं निकाल सकते हो।

मैंने तुम्हें कुआं बेचा है, कुएं का पानी अभी भी मेरा है। किसान मायूस हो गया और न्याय के लिए राजा के दरबार में शिकायत करने पहुंच गया। मालूम है उस राजा का नाम क्या था? राजा अकबर। राजा अकबर ने उस किसान की पूरी कहानी सुनी और फिर उस आदमी को दरबार में बुलाया, जिसने वह कुआं बेचा था।

राजा का फरमान सुनते ही वह आदमी भागा-भागा दरबार में हाजिर हो गया। राजा ने उससे पूछा, जब तुमने इस किसान को अपना कुआं बेच दिया, तो फिर इसे पानी क्यों नहीं लेने दे रहे हो।

आदमी बोला, महाराज मैंने इसे केवल कुआं बेचा था, पानी नहीं। यह बात सुनकर राजा भी सोच में पड़ गए। उन्होंने कहा कि बात तो यह पते की कह रहा है, कुआं बेचा है, पानी तो नहीं। काफी देर सोचने के बाद जब इस समस्या को सुलझाने में वह नाकाम हो गए, तो उन्होंने बीरबल को बुलाया।

बीरबल बहुत ही बुद्धिमान था। इसलिए, राजा अकबर किसी भी मामले पर फैसला लेने से पहले उसकी राय जरूर लेते थे। बीरबल ने एक बार फिर दोनों से उनकी समस्या पूछी। पूरी बात जानने के बाद बीरबल ने उस आदमी से कहा ठीक है, तुमने कुआं बेचा पानी नहीं।

फिर तुम्हारा पानी किसान के कुएं में क्या कर रहा है? कुआं तुम्हारा नहीं है, फौरन अपने पानी को कुएं से बाहर निकालो। बीरबल का इतना कहते ही, उस आदमी को समझ आ गया कि अब उसकी चालाकी किसी काम नहीं आने वाली। उसने राजा से फौरन माफी मांगी और माना कि कुएं के साथ उसके पानी पर भी किसान का पूरा अधिकार है।

यह देखकर राजा अकबर ने बीरबल की बुद्धिमानी की तारीफ की और कुआं बेचने वाले आदमी पर धोखेबाजी के लिए जुर्माना लगाया।

कहानी से सीख -: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कभी भी दुसरो को धोखा नही देना चाहिये हमारी ऐसी चतुराई किसी काम की नही जिससे दुसरे परेशान हो जाए

Akbar birbal short stories in hindi | राज्य के कौवों की गिनती की कहानी

Akbar Birbal Ka Kissa
akbar birbal story in hindi

एक दिन राजा अकबर और बीरबल राज महल के बगीचे में टहल/घूम रहे थे। बहुत ही सुन्दर सुबह थी, बहुत सारे कौवे तालाब के आस पास उड़ रहे थे। कौवों को देखते ही बादशाह अकबर के मन में एक प्रश्न उत्पन्न हुआ। उनके मन में यह प्रश्न उत्पन्न हुआ कि उनके राज्य में कुल कितने कौवे होंगे?

बीरबल तो उनके साथ ही बगीचे में टहल रह थे तो राजा अकबर नें बीरबल से ही यह प्रश्न  कर डाला और पुछा ! बीरबल, आखिर हमारे राज्य में कितने कौवे हैं? यह सुनते ही चालक बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया – महाराज, पुरे 95,463 कौवे हैं हमारे राज्य में।

महाराज अकबर इतने तेजी से दिए हुए उत्तर को सुन कर हक्का-बक्का रह गए और उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने का सोचा। महाराज नें बीरबल से दोबारा प्रश्न किया ! अगर तुम्हारे गणना किये गए अनुसार कौवे ज्यादा हुए?

बिना किसी संकोच के बीरबल बोले हो सकता है किसी पड़ोसी राज्य के कौवे घूमने आये हों। और कम हुए तो! बीरबल नें उत्तर दिया, हो सकता है हमारे राज्य के कुछ कौवे अपने किसी अन्य राज्यों के रिश्तेदारों के यहाँ घूमने गए हों।

कहानी से सीख -: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर दिमाग का इस्तेमाल किया जाए तो हल समस्या का ढुढा जा सकता है

Akbar and birbal stories | अशुभ चेहरा

ashub chehra story
akbar birbal story in hindi

बहुत समय पहले, बादशाह अकबर के राज्य में यूसुफ नामक एक युवक रहता था। उसका कोई दोस्त नहीं था, क्योंकि सभी उससे नफरत करते थे। सभी उसका मजाक उड़ाते थे और जब वह सड़क पर चलता तो सब उस पर पत्थर फेंकते थे।

यूसुफ का जीवन दयनीय था, सभी सोचते थे कि वह बहुत ही बदनसीब है। लोग तो यहां तक कहते थे कि यूसुफ के चेहरे पर एक नजर डालने से, देखने वाले व्यक्ति पर भी बदनसीबी आ सकती है।

इस प्रकार, भले ही लोग यूसुफ से नफरत करते थे, पर उसकी कहानी दूर-दराज तक प्रसिद्ध थी। वह अफवाहें अकबर के कानों तक भी पहुंची। वह जांचना चाहता था कि क्या लोगों का कहना सच है। उन्होंने यूसुफ को दरबार में बुलाया और उससे विनम्रता से बात की।

लेकिन उसी वक्त एक दूत ने दरबार में आकर अकबर को सूचित किया कि बेगम गंभीर रूप से बीमार हैं। उस दूत ने कहा, ”जहांपनाह! आपसे अनुरोध है कि आप तुरंत रानी साहिबा के कक्ष में चलें। रानी साहिबा बेहोश हो गई हैं और चिकित्सकों को इसका कारण समझ नहीं आ रहा है।“

अकबर बेगम के पास भागे। वे पूरी दोपहर उनके बिस्तर के बगल में बैठे रहे। शाम को जब रानी साहिबा फिर से बेहतर महसूस करने लगी, तब अकबर दरबार में लौट आये। यूसुफ अभी भी उनका इंतजार कर रहा था।यूसुफ को देखते ही अकबर को गुस्सा आ गया।

वे गरजे, ”तो सारी अफवाहें सच हैं। तुम वास्तव में मनहूस हो। तुमने बेगम को बीमार बना दिया है।“ उसने जेल के पहरेदारों को यूसुफ को ले जाने का आदेश दे दिया।बेचारे यूसुफ के पास और कोई चारा नहीं था। वह जोर से चिल्लाया और पहरेदारों से छोड़ने की विनती की। बादशाह का निर्णय बहुत अनुचित था। लेकिन दरबार में कोई भी सम्राट के विरोध में कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं कर पाया।

अचानक बीरबल वहां गया, जहां यूसुफ खड़ा था, और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। यूसुफ बादशाह के सामने झुककर बोला, ”जहांपनाह! मैं कैदखाने में जाने को तैयार हूं, पर आप मेरे एक सवाल का जवाब दीजिए, ”यदि मेरे चेहरे को देखकर रानी बीमार हो गई हैं

तो मेरा चेहरा आपने भी देखा है, तो आप बीमार क्यों नही हुए।अकबर को अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने यूसुफ को जाने दिया और खजाने में से सोने का एक थैला उसे भेंट किया। एक बार फिर दरबार में बैठे लोगों ने बीरबल के ज्ञान और बुद्धि की प्रशंसा की।

कहानी से सीख -: इस कहानी से यह सीख मिलती है कि दिन का शुभ या अशुभ होना किसी के चेहरे पर नहीं बल्कि हमारी सोच व कर्मों पर निर्भर करता है।

Short story of akbar and birbal | गलत आदत

akbar birbal galat bat story
akbar birbal story in hindi

एक वक्त की बात है, बादशाह अकबर किसी एक बात को लेकर बहुत परेशान रहने लगे थे। जब दरबारियों ने उनसे पूछा, तो बादशाह बोले, ‘हमारे शहजादे को अंगूठा चूसने की बुरी आदत पड़ गई है, कई कोशिश के बाद भी हम उनकी यह आदत छुड़ा नहीं पा रहे हैं।’

बादशाह अकबर की परेशानी सुनकर किसी दरबारी ने उन्हें एक फकीर के बारे में बताया, जिसके पास हर मर्ज का इलाज था। फिर क्या था, बादशाह ने उस फकीर को दरबार में आने का निमंत्रण दिया।

जब फकीर दरबार में आया, तो बादशाह अकबर ने उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताया। फकीर ने बादशाह की पूरी बात सुनकर परेशानी को दूर करने का वादा किया और एक हफ्ते का समय मांगा।

जब एक हफ्ते के बाद फकीर दरबार में आया, तो उन्होंने शहजादे को अंगूठा चूसने की बुरी आदत के बारे में प्यार से समझाया और उसके नुकसान भी बताए। फकीर की बातों का शहजादे पर बहुत प्रभाव पड़ा और उसने अंगूठा न चूसने का वादा भी किया।

सभी दरबारियों ने यह देखा, तो बादशाह से कहा, ‘जब यह काम इतना आसान था, तो फकीर ने इतना समय क्यों लिया। आखिर उसने क्यों दरबार का और आपका समय खराब किया।’ बादशाह दरबारियों की बातों में आ गए और उन्होंने फकीर को दंड देने की ठान ली।

सभी दरबारी बादशाह का समर्थन कर रहे थे, लेकिन बीरबल चुपचाप था। बीरबल को चुपचाप देख, अकबर ने पूछा, ‘तुम क्यों शांत हो बीरबल?’ बीरबल ने कहा, ‘जहांपनाह गुस्ताखी माफ हो, लेकिन फकीर को सजा देने के स्थान पर उन्हें सम्मानित करना चाहिए और हमें उनसे सीखना चाहिए।’

तब बादशाह ने गुस्से में कहा, ‘तुम हमारे फैसले के खिलाफ जा रहे हो। आखिर तुमने ऐसा सोच भी कैसे लिया, जवाब दो।

तब बीरबल ने कहा, ‘महाराज पिछली बार जब फकीर दरबार में आए थे, तो उन्हें चूना खाने की बुरी आदत थी। आपकी बातों को सुनकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने पहले अपनी इस गंदी आदत को छोड़ने का फैसला लिया फिर शहजादे की गंदी आदत छुड़ाई।’

बीरबल की बात सुनकर दरबारियों और बादशाह अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ और सभी ने फकीर से क्षमा मांगकर उसे सम्मानित किया।

कहानी से सीख -: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है हमें दूसरों को सुधारने के पहले खुद सुधरना चाहिए, इसके बाद ही दूसरों को ज्ञान देना चाहिए।

Akbar story in hindi | जब अकबर हुए बीरबल से नाराज

akbar birbal shot story
akbar birbal story in hindi

बादशाह अकबर कभी कभी नाराज होकर बीरबल के साथ अपना आपा खो देते थे। ऐसे ही एक अवसर पर, उन्होंने बीरबल को शाही दरबार छोड़ने को और कभी वापिस न लौटने को कहा। इससे बीरबल को बहुत दुख हुआ और एक रात उसने किसी को बताए बगैर शहर छोड़ दिया।

कुछ दिनों बाद, अकबर को बीरबल की याद आने लगी। उन्हें एहसास हुआ कि वह बेचारे बीरबल पर कुछ ज्यादा ही कठोर हो गए थे। इसलिए अकबर ने अपने दूत को पास के गांव और शहर में उसे देखने के लिए भेजा। लेकिन अफसोस! दूतों में से कोई भी बीरबल को खोज नहीं पाया।

अकबर ने सोचा, बीरबल ने अपना देश बदल लिया होगा। इसलिए दूत उसे खोजने में असफल हो रहे हैं। बीरबल को खोजने का कुछ और ही रास्ता होना चाहिए।“

अकबर ने सभी शहर के राजाओं को निमंत्रण पत्र भेजने के लिए अपने मंत्रियों को आदेश दिया। निमंत्रण पत्र पढ़ने में बहुत अजीब था, ”मेरे राज्य का समुन्द्र शादी करना चाहता है। आपके राज्य की सभी नदियां आदर सहित आमंत्रित हैं। शादी अगले सप्ताह होनी है इसलिए कृपया उन्हें शीघ्र भेजें।“

सभी राजाओं को जब यह निमंत्रण मिला तो वे बहुत हैरान हो हुए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे उत्तर में क्या लिखें। इसलिए उन्होंने निर्णय किया कि वे निमंत्रण का उत्तर नहीं देंगे और ऐसे नाटक करेंगे कि उन्हें निमंत्रण प्राप्त ही नहीं हुआ।

लेकिन कुछ दिनों बाद, बादशाह अकबर को एक राजा का जवाब मिला। उसमें लिखा था, ”आपके आमंत्रण के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। हम शादी के लिए अपनी नदियों को खुशी – खुशी भेजना चाहते हैं, परन्तु हमारी नदियों ने अनुरोध किया है कि समुन्द्र को उन्हें लेने के लिए आधे रास्ते आना होगा।“

यह जवाब पढ़कर अकबर बहुत देर तक बहुत जोर से हंसने लगा। फिर वह बीरबल को वापस आने का अनुरोध करने के लिए अपने सैनिकों के साथ उस राजा के शहर गये। अकबर ने सही अनुमान लगाया था। दरअसल, बीरबल उसी राजा के साथ रह रहा था, जिसने जवाब भेजा था।

अकबर जब बीरबल से मिले, तो बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा, ”मैं जानता था कि सिर्फ आप ही मेरे निमंत्रण का माकूल जवाब दे सकते हैं। मैं आपको चोट पहुंचाने के लिए माफी चाहता हूं। कृपया दरबार में लौट आईये।

बीरबल भी यह देखकर बहुत खुश था कि बादशाह उसे लेने खुद आए हैं। उसने राजा को एक बड़ी विदाई देकर अकबर के साथ शहर छोड़ दिया।

कहानी से सीख -: इस कहानी से यह सीख मिलती है कि क्रोध हमारे सोचने की शक्ति को नष्ट कर देता है इसलिये अत्यधिक क्रोध नहीं करना चाहिये।

Akbar birbal kahani hindi mein | दो औरतों में से बच्चे की असली माँ की पहचान

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सम्राट का कर्तव्य पृथ्वी पर भगवान की छाया के रूप में काम करते हुए अपने राज्य में शांति व्यवस्था स्थापित करना, कमजोरों की रक्षा करना और दुष्टों को दंड देना होता है। अकबर को अपनी निष्पक्षता पर गर्व था। आखिरकार वह शहंशाह था। दुनिया उसकी शरण में थी। एक दिन उसकी शाही अदालत में दो औरतें एक बच्चे के साथ आयीं। वें दोनों फूट-फूट कर रो रही थी।

पहली औरत ने कहा ”जहांपनाह! यह बच्चा मेरा पुत्र है। मैं बहुत बीमार थी और इसकी देखभाल नहीं कर सकती थी। इसलिए मैंने इसे अपनी सहेली के पास छो़ड दिया था। किन्तु अब जब मैं ठीक हो गई हूं, तो यह मुझे मेरा पुत्र देने से इंकार कर रही है।“

इस पर दूसरी औरत ने चीखकर अकबर से कहा, ”मेरे भगवान! यह झूठ बोल रही है। यह मेरा पुत्र है और मैं इसकी मां हूं। यह औरत इस तरह की कहानियां सुनाकर मेरे पुत्र को ले जाना चाहती है।“अकबर यह निश्चय नहीं कर पा रहे थे कि औरतों को कैसे न्याय दिलाया जाए। उसने अपने सबसे बुद्धिमान मंत्री बीरबल को अदालत में बुलाया। बीरबल ने एक के बाद एक दोनों औरतों की बात सुनी और सिर हिलाया।

फिर वह अकबर की ओर झुका और बोला, ”जहांपनाह! दोनों ही औरतें इस बच्चे की मां होने का दावा कर रही है।। इसलिए हम इन दोनों को बच्चा दे देते हैं।“ बादशाह के साथ-साथ अदालत ने भी बीरबल को आष्चर्य से देखा। बीरबल ने द्वारपालस से कहा, ”इस बच्चे को पकड़कर शाही कसाई को दे दो और इसे दो भाग करने को कहो।

जब द्वारपाल ने पहली औरत के हाथ से बच्चे को लिया तो वह जोर से चिल्लाई और बादशाह के पैरों पर गिर गई। उसने विनती की, ”दया मेरे प्रभु! मेरे बच्चे को नुकसान मत पहुंचाओ। दूसरी औरत को ही मेरे बच्चे को रखने दो। मैं अपनी शिक़ायत वापिस लेती हूं। मैं अपने बच्चे से बहुत प्यार करती हूं और उसे हानि पहुंचते हुए नहीं देख सकती।“

बीरबल मुस्कराया और अकबर  से बोला, ”महाराज! यही बच्चे की असली मां है। एक मां कुछ भी सहन कर सकती है, किन्तु उसके बच्चे को कोई हानि पहुंचाए, यह वह सहन नहीं कर सकती।“अदालत में मौजूद हर किसी ने बीरबल की बुद्धि की सराहना की। अकबर ने बीरबल को इस समस्या को सुलझाने के लिए सुन्दर उपहार दिया।

कहानी से सीख -: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि एक माँ कुछ भी सहन कर सकती है किन्तु उसके बच्चे को कोई हानि पहुँचाये ये वो कभी सहन नहीं कर सकती।

(Source : Kids Stories In Hindi)

हमारी पोस्ट akbar birbal ki story in hindi को पढ़ने के लिये आपका शुक्रिया। आशा है आपको यह पोस्ट जरूर पसंद आयेगी।


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