Diwali Essay In Hindi | [13]+ Diwali Par Nibandh (Dec 2021)

diwali essay in hindi

नमस्कार दोस्तों, हमारी आज की पोस्ट diwali essay in hindi में हम आपके लिये लाये हैं, दिवाली पर निबंध, जिन्हे आप स्कूल या कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता में लिख सकतें है, और सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं। दोस्तों हम सभी जानते हैं कि दिवाली हमारे देश का प्रमुख त्यौहार है। जब भगवान श्रीराम अयोध्या वापस आये थे, तो अयोध्या वासियों ने उनके आने की खुशी में घी के दिये जलाकर इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया था। यह बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।


Diwali Essay In Hindi – दिवाली पर निबंध


diwali nibandh in hindi

प्रस्तावना

भारत को त्यौहारों का देश माना जाता है। भारत के प्रमुख त्यौहार होली,रक्षाबंधन, दशहरा और दीपावली हैं। पर इन सभी त्यौहारों में दीपावली सबसे अधिक प्रमुख त्यौहार है। दीपावली, दिवाली या दीवाली शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार है। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। जो ग्रेगोरी कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है।

दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह ” अंधकार पर प्रकाश की विजय ” को दर्शाता है। यह त्यौहार दीपों का पर्व है। जब हम अज्ञान रूपी अंधकार को हटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश प्रज्ज्वलित करते हैं तो हमें एक असीम और आलौकिक आनन्द का अनुभव होता है। दीपावली भी ज्ञान रूपी प्रकाश का प्रतीक है। इस दिन दीप जलाये जाते हैंद्य इसलिए दीपावली का त्यौहार पांच दिन तक मनाया जाता है।

दशहरे के त्यौहार के बाद से ही दीपावली की तैयारियां की जाने लगती हैं। इस पर्व के दिन लोग रात को अपनी प्रसन्नता प्रकट करने के लिए दीपों की पंक्तियाँ जलाते हैं। और प्रकाश करते हैं। नगर और गाँव दीपों की पंक्तियों से जगमगाने लगते हैं ऐसा लगता है मानो रात दिन में बदल गयी हो।

दीपावली का अर्थ:

दीपावली शब्द संस्कृत से लिया गया है। दीपावली दो शब्दों से मिलकर बना होता है दीप और आवली जिसका अर्थ होता है दीपों से सजा।

दीपावली को रोशनी का त्यौहार और दीपोत्सव भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन हम सभी दीपों की पंक्ति बनाकर अंधकार को मिटाने में जुट जाते हैं | और अमावस्या की अँधेरी रात जगमग असंख्य दीपों से जगमगाने लगती है।

दीपावली का यह पावन पर्व कार्तिक मांस की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। गर्मी और वर्षा ऋतू को विदा कर शीत ऋतू के स्वागत में यह पर्व मनाया जाता है।

दीपावली पर्व का महत्व:

दीपावली का भारत देश में बहुत अधिक महत्व है। इस दिन को अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन को बहुत ही सुंदर और बड़े पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। जब भगवान श्री राम लंकापति रावण को मारकर और चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे, तो अयोध्यावासियों ने उनके आगमन पर प्रसन्नता प्रकट करने के लिए और उनका स्वागत करने के लिए दीपक जलाए थे।

उसी दिन की पावन स्मृति में यह दिन बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था इसी वजह से दीपावली पर लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और घर में धन-धान और एश्वर्य की कामना की जाती है।

दीपावली की तैयारियां:

दीपावली की तैयारियां लोग दशहरे से ही करने लग जाते हैं। दीपावली से पहले सभी लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, और घर की लिपाई-पुताई करवाते हैं। दीपावली के अवसर पर लोग अपने लिए नए कपड़े, मोमबत्तियां, खिलौने, पटाखे, मिठाईयां, रंगोली बनाने के लिए रंग और घरों को सजाने के लिए बहुत सामान खरीदते हैं।

दीपावली के दिन पहनने के लिए नए कपड़े बनवाए जाते हैं, मिठाईयां बनाई जाती हैं। घरों को सजाने के लिए बिजली से जलने वाली झालर लगाई जाती है। दीपावली भारत का सबसे अधिक प्रसन्नता और मनोरंजन का पर्व है। इस दिन बच्चों से लेकर बूढों तक में खुशी की लहर उत्पन्न हो उठती है। आतिशबाजी और पटाखों की आवाज से सारा आकाश गूंज उठता है।

खुशियों की बौछार दिवाली, जीवन में उपहार दिवाली।
तन-मन घर सब स्वच्छ उजेरे, दीपों का त्योहार दिवाली।।

दीपावली का वर्णन:

दीपावली त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दीपावली का त्यौहार पांच दिनों तक चलने वाला सबसे बड़ा त्यौहार होता है। दीपावली से तीन दिन पहले धनतेरस आती है । इस दिन के अवसर पर लोग पुराने बर्तनों को बेचते हैं और नए बर्तनों को खरीदते हैं।

धनतेरस के दिन व्यापारी अपने नए बहीखाते बनाते हैं। अगले दिन नरक चौदस के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना अच्छा माना जाता है। अमावस्या के दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। पूजा में खील-बताशे का प्रसाद चढाया जाता है। नए कपड़े पहने जाते हैं। असंख्य दीपों की रंग-बिरंगी रोशनियाँ मन को मोह लेती हैं।

दुकानों, बाजारों और घरों की सजावट दर्शनीय रहती है। अगला दिन परस्पर भेंट का दिन होता है। एक-दूसरे के गले लगकर दीपावली की शुभकामनाएँ दी जाती हैं। गृहिणियां मेहमानों का स्वागत करती हैं। लोग छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का भेदभाव भूलकर आपस में मिलकर इस त्यौहार को मनाते हैं।

स्वच्छता का प्रतीक:

दीपावली जहाँ पर अंतरूकरण के ज्ञान का प्रतीक है, वहीं पर बाह्य स्वच्छता का भी प्रतीक है। घरों में मच्छर,खटमल, पिस्सू आदि धीरे-धीरे अपना घर बना लेते हैं। मकड़ी के जाले लग जाते हैं, इसीलिए दीपावली से कई दिन पहले से ही घरों की सफाई, लिपाई, पुताई और सफेदी होने लग जाती है। सारे घर को चमकाकर स्वच्छ किया जाता है। लोग अपनी परिस्थिति के अनुकूल घरों को सजाते हैं।

उपसंहार:

दीपावली हमारा धार्मिक त्यौहार है। दीपावली का पर्व सभी पर्वों में एक विशिष्ट स्थान रखता है। हमें अपने पर्वों की परम्पराओं को हर स्थिति में सुरक्षित रखना चाहिए। परम्पराएँ हमें उस पर्व के आदिकाल में पहुंचा देती हैं, जहाँ पर हमें अपनी आदिकालीन संस्कृति का ज्ञान होता है। आज हम अपने त्यौहारों को भी आधुनिक सभ्यता का रंग देकर मनाते हैं। लेकिन हमें उसके आदि स्वरूप को बिगाड़ना नहीं चाहिए। इसे हमेशा यथोचित रीति से मनाना चाहिए।

जुआ और शराब का सेवन बहुत ही बुरा होता है, हमें सदैव इससे बचना चाहिए। आतिशबाजी पर अधिक व्यय नहीं करना चाहिए। हम सभी का कर्तव्य होता है कि हम अपने पर्वों की पवित्रता को बनाये रखें। इस दिन लोग व्याख्यान देकर जन साधारण को शुभ मार्ग पर चला सकते हैं।

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Diwali In Hindi – दिवाली पर निबंध हिन्दी में


10 lines on diwali
Short Essay On Diwali In Hindi

प्रस्तावना

“ये प्रकाश का अभिनन्दन है, अंधकार को दूर भगाओ
पहले स्नेह लुटाओ सब पर, फिर खुशियों के दीप जलाओ”

दिवाली का दिन भारतवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है। भारत में हर धर्म के लोग रहते हैं और भारत सभी धर्मों का सम्मान करता है। दिवाली का त्यौहार एक तरह से हिन्दुओं का विशेष त्यौहार है। यह त्यौहार 5 दिनों तक चलता है। इसकी ख़ुशी हर भारतीय को होती है।

भारत में दिवाली:

भारत विभिन्न संस्कृतियोंए विचारों, भाषाओं, परम्पराओं, रीतिरिवाजों और विभिन्न धर्मों वाला देश है। यहां पर सभी धर्मों के त्यौहारों को धूमधाम से मनाया जाता है। भारत विश्व के सभी देशों से सबसे अधिक त्यौहार मनाता है। इस कारण भारत को त्यौहारों की भूमि कही जाती है। भारत में हर त्यौहार को बड़े महत्व के साथ मनाया जाता है। भारत में हर त्यौहार का विशेष महत्व होता है। और हर एक महीने में कई त्यौहार मनाये जाते हैं।

इन त्यौहारों में दिवाली का विशेष महत्व होने के साथ.साथ हिन्दू धर्म में भी इसका विशेष महत्व है। यह हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है और ये हर हिन्दू द्वारा मनाया जाता है। आज के समय में दिवाली का त्यौहार सभी धर्मों के लोग मनाने लग गये हैं। सभी धर्मों के लोगों ने इसका महत्व समझना शुरू कर दिया है।

विभिन्न धर्मों में दिवाली का महत्व:

भारत में सभी धर्म के लोग रहते है और सभी लोग दिवाली का त्यौहार अलग-अलग कारणों से मनाते है।

हिन्दू धर्म के लोग इस दिन को बुराई पर अच्छाई पर विजय के रूप में मानते हैं। दिवाली का त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन पूरा अन्धकार छाया हुआ रहता है। इस दिन ही भगवान श्री राम रावण को मारकर और अपने 14 वर्ष का वनवास को पूरा कर अयोध्या वापस लौटे थे। इस दिन अयोध्या के लोगों ने राम के आने की ख़ुशी में पूरे अयोध्या को अमावस्या के अन्धकार से मुक्त कर दिया था। पूरी अयोध्या नगरी रोशनी से चमक रही थी भगवान राम के स्वागत में। उस दिन भगवान राम बुराई पर अच्छाई को विजय कर अयोध्या लौट रहे थे।

जैन धर्मरू जैन धर्म के लोग इस दिन दिवाली इस लिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन भगवान माहवीर को मोक्ष प्राप्त हुआ था और किसी संयोग से इसी दिन उनके शिष्य गौतम को भी ज्ञान प्राप्त हुआ था।

सिख धर्म के लोग दिवाली इस लिए मानते हैं, क्योंकि इसी दिन ही 1577 में पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर का शिलन्यास हुआ था | और इसी दिन ही सिखों के छठे गुरु गुरू हरगोबिन्द साहब जी को जेल से रिहा किया गया था।

दिवाली कैसे मनाते हैं:

दिवाली का नाम सुनते ही सभी लोगों के चेहरों पर एक अलग सी ख़ुशी छा जाती है। इस दिन सभी लोग अपने.अपने घरों, दुकानों आदि की साफ़ सफाई करते हैं। उनको नये रंग से रंगते हैं । इस दिन घरों को दीपों से सजाया जाता हैद्य ये त्यौहार 5 दिनों तक चलता है। इस दिन लोग अपने घरों में नई वस्तुएं खरीद कर लाते है और भी कई सारी वस्तुएं, कपड़ों, वाहनों और अति आवश्यक चीजों की खरीदारी करते हैं।

इस दिन घर में लक्ष्मी आने का संकेत माना जाता है और इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। घरों में मिठाइयां बनाई जाती हैंए सभी में बांटी जाती है और सभी लोग अपने बुरी बातों को भूलकर सबको शुभकामनाएं देते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की भी पूजा की जाती है।

उपसंहार:

भारत विभिन्न मान्यताओं और रीतिरिवाजों वाला देश है। यहां पर सभी संस्कृति के लोग रहते हैं और सभी अपने त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते है। दिवाली एक ऐसा त्यौहार है जो सभी धर्मों के लोगों द्वारा मनाया जाता है।


Diwali Par Nibandh – दिवाली पर निबंध इन हिन्दी


diwali nibandh
Diwali Par Nibandh In Hindi

प्रस्तावना

दीपावली का त्यौहार खुशियों और सुख-समृद्धि का त्यौहार है। यह हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। दिवाली के त्यौहार को भारत के प्रत्येक राज्य में मनाया जाता है। इस दिन अमावस्या की काली रात होने के बावजूद भी पूरा भारत रोशनी से जगमगाया हुआ होता है।

दिवाली का त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। इस त्यौहार को सिर्फ हमारे देश में ही ही ही विदेशों में भी मनाया जाता है इससे इसकी प्रमुखता का पता लगाया जा सकता है। केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है बल्कि इसका सामाजिक, आध्यात्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व भी है।

दिवाली के त्यौहार को हिंदू धर्म के लोगों के साथ साथ वर्तमान में अन्य लोगों द्वारा भी बहुत ही धूमधाम है और हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

दिवाली त्योहार का इतिहास:

दीपावली का त्यौहार भारत में प्राचीन समय से ही मनाया जाता रहा है इस त्यौहार का इतिहास अलग.अलग राज्यों के लोग भिन्न.भिन्न मानते है लेकिन अधिकतर लोगों का मानना है कि जब भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत के लिए घी के दीपक प्रज्वलित किए थे | और साथ ही अयोध्या के हर रास्ते को सुनहरे फूलों से सजा दिया गया था।

जिस दिन भगवान राम अयोध्या लौट कर आए थे उस दिन अमावस्या की काली रात थी, जिसके कारण वहां पर कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था | इसलिए अयोध्या वासियों ने वहां पर दीपक जलाए थे | इसलिए इस दिन को अंधकार पर प्रकाश की विजय भी माना जाता है।

जैन धर्म के लोग दीपावली के त्यौहार को इसलिए मनाते हैं, क्योंकि चौबीसवें तीर्थंकर, महावीर स्वामी को इस दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, और संयोगवश इसी दिन उनके शिष्य गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

सिख धर्म के लोग भी इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं वे लोग त्यौहार को इसलिए मनाते है क्योंकि इसी दिन ही अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था। साथ ही सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को भी इसी दिन जेल से रिहा किया गया था

दिवाली कैसे मनाई जाती है:

दिवाली के त्यौहार की तैयारियां भारत में महीने भर पहले ही प्रारंभ कर दी जाती है, क्योंकि भारत में ज्यादातर हिंदू धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं, इसलिए यह त्यौहार उनका सबसे बड़ा त्यौहार होता है। इस त्यौहार की तैयारियों को लेकर लोग इतने उत्सुक रहते हैं, कि वह महीना भर पहले ही अपने घर और प्रतिष्ठानों की साफ सफाई करने लग जाते है।

हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि अगर घर में साफ सफाई होगी तो मां लक्ष्मी उनके घर पर आएगी और साथ में सुख समृद्धि भी लेकर आएगी। आजकल लोग दीपावली के कुछ दिन पहले ही घरों की रंगाई पुताई करवाते हैं साथ ही रंग बिरंगी लाइट ओं और फूलों द्वारा अपने घर और प्रतिष्ठान को सजाते है। बाजारों में इस त्यौहार के पहले एक अलग ही रौनक आ जाती है बाजार भीड़ से खचाखच भरे रहते है हर तरफ लोग खरीदारी करते दिखाई देते है।

दीपावली का यह त्यौहार 5 दिनों तक चलता है जिस के पहले दिन धनतेरस होती है।
धनतेरस के दिन लोग खरीदारी करना पसंद करते हैं, लोग अपने घर कुछ बर्तन जरूर लेकर जाते है, साथी लोग इस दिन सोने और चांदी के आभूषण खरीदना भी पसंद करते है। लोगों का मानना है कि इस दिन खरीदारी करने से घर में बरकत होती है।

दीपावली का दूसरा दिन नरक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है
क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर को मार गिराया था। कुछ लोगों द्वारा इस दिन को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है, इस दिन घर के बाहर 5 दीपक जलाए जाते है।

तीसरा दिन दीपावली त्यौहार का मुख्य दिन होता है
दिवाली के दिन सभी लोग शाम के समय मां लक्ष्मी की पूजा करते है। इस दिन घर को दीपक जलाकर रोशनी से जगमगा दिया जाता है | भारत में इस दिन रात के समय सबसे ज्यादा रोशनी होती है।

दिवाली के चौथे दिन को गोवर्धन पूजा की जाती है,
क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र की क्रोध से हुई मूसलाधार वर्षा से लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत अपनी एक अंगुली पर उठा लिया था। इस दिन घर के बाहर महिलाएं गोबर रखकर पारंपरिक पूजा करती है।

दिवाली त्योहार का आखिरी दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है
इस दिन बहन ने भाई को रक्षा सूत्र बनती हैं साथ ही तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है और बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं और उन्हें अच्छा उपहार भी देते है।

deepavali par nibandh

दीपावली का महत्व:

दीपावली का त्योहार सभी वर्गों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है यह हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार माना गया है। दीपावली त्यौहार की आध्यात्मिक महत्व जुड़ा हुआ है, यह त्योहार अनेक धार्मिक ऐतिहासिक और कहानियों से मिलकर बना है। दीपावली के त्यौहार को हिंदू, जैन, सिख आदि धर्मों द्वारा भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है इन सभी धर्मों में दीपावली के दिन ही ऐसी कोई ना कोई घटना हुई है जिससे अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा बुराई पर अच्छाई की विजय हुई है।

इस दिन सभी लोग पूजा करते हैं एक दूसरे से मिलने जाते है जिससे सामाजिक सद्भावना उत्पन्न होती है।
आजकल की भीड़भाड़ जिंदगी में लोगों को एक दूसरे से मिलने का कोई मिलता है, इसलिए इस दिन लोग एक दूसरे से स्नेह मिलन के रूप में मिलते हैं, साथ में एक दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं और गले मिलते हैं जिसे लोगों को एक दूसरे की भावनाओं और धर्मों को समझने में रुचि उत्पन्न होती है।

दीपावली के त्यौहार पर भारतीय लोग जमकर खरीदारी करते हैं, वे अपने घरों में सभी सुख सुविधाओं की चीजें लेकर जाते है। सभी लोग अपने घरों में उपहारए सोने.चांदी के आभूषणए बर्तनए राशन का सामान, कपड़े, मिठाइयां इत्यादि लेकर जाते है। इस पर्व पर लोग वर्ष के सभी दिनों से ज्यादा खरीदारी करते है।इसलिए बाजारों में इस दिन ज्यादा चहल-पहल और अधिक खरीदारी होती है जिसके कारण लोगों की आमदनी बढ़ जाती है।

दीपावली त्योहार के पीछे सबसे पुराना आर्थिक महत्व इस बात पर जुड़ा हुआ है, कि भारत में लगभग सभी फसलें मानसून पर निर्भर करती है, इसलिए गर्मियों की फसल इस त्यौहार के पर्व से कुछ दिन पहले ही पक कर तैयार हो जाती है, तो किसान इस फसल को काटकर बाजारों में बेचकर आमदनी कमाता है।

दीपावली के त्यौहार के इस दिन बहुत सी ऐतिहासिक घटनाएं घटी है, जिसके कारण इस त्योहार का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या में लौटे थे और वे श्रीराम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहलाए थे। इसी दिन समुंदर मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था | जिन्हें धन और सुख.समृद्धि की देवी भी कहा जाता है। स्वामी रामतीर्थ का जन्म व महाप्रयाण दोनों दीपावली के दिन ही हुए थे। दीपावली के पावन अवसर पर आर्य समाज की स्थापना हुई थी।

1619 में दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था। महावीर स्वामी को इस दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।

उपसंहार:

इस त्योहार से हमें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रहती है यह त्यौहार हमें सिखाता है कि कभी भी अंधकार से नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक छोटे से दीपक की लौ भी काले अंधकार को प्रकाश में बदल सकती है। इसलिए समय हमेशा जीवन में आशावादी रहना चाहिए और अपने जीवन में हमेशा खुश रहना चाहिए।

दीपावली का त्यौहार सांस्कृतिक इन सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है इस त्यौहार से सभी के जीवन में खुशियां आती है इसी त्यौहार के कारण लोगों में आज भी सामाजिक एकता बनी हुई है।


Diwali Ka Nibandh –  दिवाली का निबंध


diwali essay in hindi for child

दीपावली का त्यौहार भारतवर्ष मे बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह दीप का त्यौहार है इस दिन भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त करके आयोध्य वापस लोटे थे तो अयोध्यावासियों ने उनका स्वागत तेल के दिये जलाकर किया था। इसलिए सभी लोग अपने घरो को दियो से सजाते है।

दीवाली दिन सभी के घरो मे तरह दृ तरह के पकवान बनते है और सभी लोग एक दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते है और मिठाई और गिफ्ट्स देते हैद्य दीवाली के दिन शाम को लक्ष्मी पुजन होता है लक्ष्मी पुजन के बाद बच्चे पटाके चलाते है इस दिन पूरी रात जगमग रहती है।

भारत त्यौहारो की भूमि के रूप मे जाने वाला महान देश है, यहाँ प्रसिद्ध और सबसे मनाया जाने वाले त्यौहारो मे से एक दीपावली है। दिवाली हिन्दुओ का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, जो देशभर मे और साथ ही देश के बाहर हर साल मनाया जा रहा है, यह रोशनी का त्यौहार है, जो की लक्ष्मी के घर आने और बुराई से सच्चाई की जीत का प्रतीक है।

यह तब मनाया जाता है, जब 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे थे। और अयोध्या के लोगों ने उनका तेल का दीपक जलाकर स्वागत किया था। यही कारण है की इसे प्रकाश का महोत्सव कहा जाता है।

इस दिन भगवान राम ने लंका के राक्षस राजा रावण को मार डाला, ताकि पृथ्वी को बुरी गतिविधियो से बचाया जा सके, यह हिन्दू कैलेंडर द्वारा हर साल कार्तिक के महीने की अमावस्या पर मनाया जाता है, दीवाली के दिन हर कोई खुश होता है और एक दूसरे को बधाई देता है।

लक्ष्मी जी का स्वागत करने के लिए लोग अपने घरो,कार्येलयों और दुकानों को साफ करते है और सफेदी भी करवाते है, वे अपने घरो को सजाते है, और दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का स्वागत करते है।

दीवाली के त्यौहार मे पाँच दिन का जश्न है जिसे आनद और प्र्सन्नता के साथ मनाया जाता है

  • पहला दिन धनतेरस के रूप मे जाना जाता है।
  • दूसरे दिन नारक चतुदर्शी या छोटी दीवाली।
  • तीसरा दिन मुख्य दीपावली या लक्ष्मी पुजा।
  • चौथे दिन गोबर्धन पुजा।
  • पांचवे दिन भैया दौज।

दीवाली समारोह के पाँच दिनो मे से प्रत्येक का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वाश हैद्य यह हमारे देश के प्रत्येक नुक्कड़ और कोने मे मनाया जाता है। इस प्रकार यह त्यौहार भी लोगों के बीच एकता की भावना पैदा करता है। भारत इस त्यौहार को हजारो सालो से मना रहा है और आज भी इसे जशन और उललास के साथ मनाया जाता हैए जो एतिहासिक और धार्मिक दोनों है।

” हर घर में दिवाली हो, हर घर में दिया जले
जब तक ये रहे दुनिया जब तक संसार चले
दुःख, दर्द, उदासी से हर दिल महरूम रहे
पग पग उजियालो में जीवन की ज्योति जले “


Diwali Per Nibandh – दिवाली निबंध


10 short lines on diwali in hindi

“दियो की रोशनी से झिलमिलता आँगन हो,
पटाखो की गूंज से आसमान रोशन हो
ऐसी आए झूम के यह दीवाली आपकी,
हर तरफ खुशियों का ही मौसम हो,

दीवाली का पर्व भारत के सबसे बड़े त्यौहारो मे से एक है, वैसे तो यह हिन्दुओ का पर्व है लेकिन आजकल इसे अन्य समुदाय के लोग भी मनाते है।

अमावस्या की काली रात को दीये, मोमबतियाँ बिजली के छोटे-छोटे बल्बो तथा रोशनी की लड़ियों द्वारा घरो, दुकानों, भवनो और मंदिरो को प्रकाशित किया जाता है।इसलिए दिवाली को प्रकाश का उत्सव भी कहा जाता है, माता लक्ष्मी की पुजा की जाती है, और लोग एक दूसरे को बधाई देते है।

ऐसा माना जाता है की दीवाली के दिन ही भगवान रामचन्द्र चौदह वर्ष का बनवास काटने के बाद अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे।

अयोध्यावासियों ने पूरी अयोध्या नगरी की सजा कर उनका तहे दिल से स्वागत किया था। तब से यह पर्व रौशनी का प्रतीक माना जाता है। घरो को दुल्हन की तरह सजाया जाता है।

दीवाली की तैयारी कई दिन पहले ही शुरू हो जाती है, घरो और अन्य स्थानो की सफाई शुरू कर देते है, ऐसा माना जाता है की भगवान लक्ष्मी, जो धन की देवी है, स्वच्छ स्थान पर ही आती है और रहती है।

दीवाली से कुछ दिन पहले ही घरो और दुकानों की सफाई, पुताई और सजावट का काम शुरू हो जाता है। इस त्यौहार पर कोई न कोई धातु का बर्तन, गहना आदि खरीदना शुभ माना जाता है।

सब दुकानों पर गहमा-गहमी दिखाई देती है, इस दिन दुकानदार नय वही.खाते भी खोलते है, ख़रीदारी बाजार से हो या ऑनलाइन, व्यपारी तरह-तरह के डिस्काउंट और छुट देकर ग्राहको को लुभाते है।

मिठाई की दुकानों पर अच्छी ख़ासी भीड़ देखी जा सकती है। सोने के आभूषणो की बिक्री भी बढ़ जाती है। स्कूली बच्चो के लिए यह पर्व खुशियो की सौगात ले कर आता है। उन्हे दीवाली की लंबी छुट्टी मिलती है। वे इन छूटियों का भरपूर आनंद लेते है।

दीवाली से कुछ दिन पूर्व ही शहरो और कस्बो मे राम लीला की जाती है।

भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान आदि की झाकिया निकाली जाती है। यह दिखाया जाता है, दीवाली मनाने का उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत है, दीवाली के अवसर पर बहुत से टीवी चैनल्स रंगा-रंग प्रोग्राम आयोजीत करके अपने दर्शको का मनोरंजन करते है।

भारत के अलावा दीवाली नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मारीशष, युगान, त्रिनिदाद, और टोबेङ्गो, सूरीनम, मलेशिया, सिंगापूर, फिजी, पाकिस्तान, औस्ट्रेलिया, आदि देशो मे भी मनाई जाती है, भारतीय मूल के लोग चाहे किसी देश मे भी रहते होए दीवाली अवश्य मनाते है।

दीवाली मे पटाखो का इस्तेमाल खूब किया जाता है। जैसा की हम जानते है की पटाखे रसयान से बने होते है, जब वह जलते है तब कई हानिकारक गैसे उत्पन्न होती हैए जो हमारे वातावरण को बुरी तरह प्र्दूषित करती है।

एक अनुमान के अनुसार दीवाली की रात बहुत बड़ी मात्रा मे विशेली गैसे वायुमंडल मे छोड़ दी जाती है। अतंतरू ये गैसे स्वास के द्वारा हमारे शरीर मे प्रवेश कर हुमे हानी पहुँचती है।

दीवाली प्रकाश का त्यौहार है, ध्वनि एव प्रदूषण का नहीं, हमे दीवाली को धूमधाम से मनाने का पूरा हक है, लेकीन उसे प्रदूषित करने का नहीं, अगर पर्यावरण सुरक्षित है, तभी हम सब इस धरती पर बचे रह सकते है, तो आईये इस दीवाली को पटाखो से दूर रह कर प्रदूषण मुक्त और यादगार बनाए।

दीवाली कहीं भी मनाई जाय और कितनी धूम-धाम से मनाई जाए, परन्तु हमे दीवाली का मुख्य संदेश नहीं भूलना चाहिए और यह संदेश है की बदी पर हमेशा नेकी की जीत होती है।

आज के युग मे ये जरूरी हो गया है, की हमे बाहरी जगमगाहट के साथ-साथ अपने मनो को भी प्रकाशित करना चाहिए, दीवाली से हुए प्रदूषण को साफ करते समय हमे अपने मनो की मैल भी दूर करनी चाहिए और जग मे अमन शांति रखने का प्रयास और कामना करनी चाहिए।

” मुस्कुराते हँसते दीप तुम जलाना
जीवन में नई खुशियों को लाना
दुःख दर्द अपने भूलकर
सबको गले लगानाए सबको गले लगाना
आपको इस दिवाली की शुभकामनाएं “

(Source : Suvichar Kosh)

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