Jal Hi Jivan Hai | Best [9]+ जल ही जीवन है पर निबंध (Dec 2021)

Jal Hi Jivan Hai

दोस्तों आज हम हिंदी व्याकरण में आपके लिए लाए हैं, jal hi jivan hai पर निबंध , जो बहुत ही सरल भाषा में लिखा गया है। दोस्तों जल बिना जीवन नही है, हम सब को मिलकर पानी के अनावश्यक दोहन को रोकना है | हमारे जीवन में जल का कितना महत्व है, यह हमने निबंध के माध्यम से बताया है। ये निबंध आप हमारे स्कूल या कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता में लिख सकते हैं। और सोशल मीडिया पर शेयर भी कर सकते हैं।


जल ही जीवन है पर निबंध (Jal Hi Jivan Hai)


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Jal hi jivan hai

प्रस्तावना –

वेदों में कहा गया है ’आप एव ससर्जादौ’ अर्थात् परमात्मा ने सबसे पहले जल की सृष्टि की। पुराणों में विष्णु के प्रथम अवतार वाराह द्वारा जलमग्न पृथ्वी का उद्धार किए जाने का वर्णन मिलता है। प्रलय अर्थात् सृष्टि का अन्त होने पर समस्त धरती जलमग्न हो जाती है।

इन बातों को हम मिथक कह सकते हैं, किन्तु विज्ञान के अनुसार जल जीवन या जीव सृष्टि की प्रथम शर्त है। चन्द्रमा या मंगल पर जीवन की खोज में जुटे वैज्ञानिकों की आशा का बिन्दु भी वहाँ कहीं न कहीं जल की उपस्थिति पर ही टिका है। शब्दकोश भी जल और जीवन को पर्यायवाची बताता है।

जल का महत्त्व –

रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून
पानी गए न ऊबरै, मोतीए मानुष, चून

कविवर रहीम कहते हैं कि पानी को बचा कर रखें क्योंकि पानी बिना सब सून। पानी अगर न रहा तो मोती, मनुष्य और अनाज किसी का उद्धार नहीं हो सकता है।

वर्तमान संदर्भ में व्याख्या –

जिनके पास पानी की अभाव है वह तड़प रहे हैं, पर जिनके पास है वह भी फैलाने में लगे हैं। अपनी कारों और मोटर साइकिलों को ऐसे ही रोज नहलाते हैं जैसे कि वह गाय या बैल हों। लोग पानी को ऐसे फैलाये जा रहे हैं जैसे कभी खत्म नहीं होगा। यह आश्चर्य की बात है कि आज कई जगह जल बचाने के लिऐ आंदोलन चल रहे हैं।

जबकि रहीम जी का यह दोहा तो सैंकड़ों बरसों से इस देश में प्रचलित है, और लोग इसे अक्सर अपना ज्ञान बघारने के लिये सुनाते हैं। सच बात तो यह है कि ज्ञान सुनना अलग बात है, और उसे धारण करना अलग बात है। इस देश मेंं संत हो या आम आदमी सभी लोग ज्ञान और ध्यान की किताबें पढ़-पढ़कर उसका लिखा एक दूसरे को सुनाते हैं | पर धारण कोई नहीं करता। अगर धारण करने वाले लोग होते तो आज इस तरह पानी के लिये बेहाल नहीं होते।

समस्या यह नहीं है कि जल की कमी है, बल्कि बढ़ते शहरीकरण के कारण उसके स्त्रोतों में कमी आयी है, पर उपयोगिता की मात्रा बढ़ गयी है। आजकल कूलरों में पानी डालने के अलावा अपने वाहनों को साफ करने पर भी उसका अपव्यय होता है। ऐसे में इतना तो हो ही सकता है कि गर्मियों में लोग पानी फैलाने का काम न करें पर शायद ही कोई यह बात माने।

सम्पूर्ण सौरमण्डल में आज तक ज्ञात ग्रहों में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है, जहाँ जल का अपार भण्डार है। जल के बिना जीवन की कल्पना ही असम्भव है। जल ने ही पृथ्वी पर चर-अचर जीव जगत् को सम्भव बनाया है। मानव शरीर में भी सर्वाधिक मात्रा जल की ही है। जलाशयों में तैरकर और नौकाविहार करके हम आनन्दित होते हैं। हमारी गृह-वाटिकाओं में जल चाहिए। पार्कों और वनांचलों की हरियाली जल पर ही टिकी है। जल के बिना कृषि की कल्पना ही नहीं की जा सकती। जीवन के अस्तित्व और पोषण से जुड़ी किसी भी वस्तु को देख लीजिए, किसी न किसी स्तर पर उसे जल के योगदान की आवश्यकता अवश्य होती है।

जलाभाव का परिणाम –

कल्पना कीजिए कि पृथ्वी कभी जल-विहीन हो जाय तो क्या दृश्य उपस्थित होगा, सारा जीव जगत् तड़प-तड़प कर दम तोड़ेगा। यह मनोरम हरीतिमा, ये इठलाती नदियाँ, झर-झर करते निर्झर लहराते सागर, रिमझिम बरसते मेघ, ये चहल-पहल दौड़ते वाहन नृत्य/संगीत के आयोजन, ये मारा-मारी सब कुछ नाम शेष हो जाएँगे। जल की कमी हो जाने पर जीवन के लाले पड़ जाते हैं, और कृत्रिम उपायों से शरीर में उसकी पूर्ति करनी पड़ती है।

हमारे भोजन,वस्त्र, भवन, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संतुलन सभी के लिए जल का कोई विकल्प नहीं है। हमारी सुख-सुविधाए आमोद-प्रमोद और मनोरंजन भी जल से जुड़ा हुआ है। घरों में कपड़े धोने, भोजन बनाने, स्नान करने और गर्मी से बचने को कूलर चलाने में जल ही सहायक होता है।

जल की उपलब्धता –

प्रकृति ने जीवनाधार जल की प्रभूत मात्रा मानव जाति को उपलब्ध कराई है। पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई भाग जलावृत है। इसमें मानवोपयोगी जल की मात्रा भी कम नहीं है। नदियों, सरोवरों, झीलों आदि के रूप में पेयजल उपलब्ध है।

भावी जल संकट –

प्रकृति के इस निःशुल्क उपहार पर संकट के बादल मँडरा रहे हैं। नगरों और महानगरों के अबाध विस्तार ने तथा औद्योगीकरण के उन्माद ने भूगर्भीय जल के मनमाने दोहन और अपव्यय को प्रोत्साहित किया है। भारत के अनेक प्रदेश जल स्तर के निरंतर गिरने से संकटग्रस्त हैं। जल की उपलब्धता निरंतर कम होती जा रही है।

इस संकट के लिए मनुष्य ही प्रधान रूप से उत्तरदायी है। अति औद्योगीकरण से बढ़ रहे भूमण्डलीय ताप (ग्लोबल वार्मिंग) से ध्रुवीय हिम तथा ग्लेशियरों के शीघ्रता से पिघलने की आशंका व्यक्त की जा रही है। वैज्ञानिक घोषणा कर रहे हैं कि अगली तीन-चार दशाब्दियों में गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र आदि का केवल नाम ही शेष रह जाएगा। हिम तथा ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र का जल-स्तर बढ़ जाएगा | तथा समुद्र तट पर बसे शहर खत्म हो जायेंगे।

उपसंहार –

जल है तो जीवन है | इस सच को राजस्थान से अधिक और कौन जानता है। जल जैसी बहुमूल्य वस्तु के प्रति हमारा उपेक्षापूर्ण रवैया कितना घातक हो सकता है | यह उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है। अतः अभी से जल-प्रबंधन के प्रति जागरूक होना हमारे लिए जीवित रहने की शर्त बन गया है।

अतः परम्परागत एवं आधुनिक तकनीकों से जल के संरक्षण और भंडारण का कार्य युद्ध-स्तर पर होना चाहिए। जनता और प्रशासन दोनों के उद्योग और सहयोग से ही इस भावी संकट से पार पाना सम्भव है।

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Essay On Water In Hindi – (Jal Hi Jivan Hai)


essay on water in hindi
Jal hi jivan hai

प्रस्तावना –

एक प्रकार से देखा जाए तो जल हर व्यक्ति की एक मूल आवश्यकता है। वैसे तो पृथ्वी का 70% भाग जल से भरा हुआ हैं। परन्तु मृदु जल में सिर्फ पृथ्वी पर 0-6 % जल की ही उपलब्धता हैं। हमारे जीवन मे जल उतना ही महत्वपूर्ण हैं। जितना कि हमारे लिए ऑक्सीजन हैं। इसीलिए यह भी कहा गया हैं कि जल ही जीवन हैं। साथ ही साथ पानी की महत्व को बताते हुए किसी कवि ने सही कहा है,

मूक अविचल बनी रही, सहती रहती वार ।।
वसुधा हरी-भरी रहे, बहता स्वच्छ जलधार ।
जल की शुद्धता बनी रहे, यही अच्छे आसार ।।

हमारे जीवन मे जल का महत्व –

वायु के बाद हमारे जीवन मे जल का सबसे महत्वपूर्ण स्थान हैं। हम यह देखते हैं। कि विश्व की प्रमुखः सभ्यताये का विकास नदी के किनारे ही हुवा था। जल के बिना हम अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। मनुष्य के शरीर के रक्त संचालन के लिए एशरीर के विभिन्न अंगों को स्वस्थ रखने हेतु शरीर के विभिन्न ऊतकों को मुलायम तथा लोचदार रखने के अतिरिक्त शरीर की कई अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी जल की समुचित मात्रा की आवश्यकता होती है। यह हमारे जीवन के लिए इतना महत्वपूर्ण है। इसके अभाव होने पर मनुष्य की मृत्यु निश्चित है।

पानी के विभिन्न उपयोग –

  • पीने के लिए पानी पीना जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। तोए पानी का मुख्य उपयोग पीने में से एक है।
  • खाना बनाने में खाना पकाने के लिए भी पानी का इस्तेमाल किया जाता है। कई व्यंजनों जैसे दाल, चावल, सूप आदि को पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा यहां तक कि सब्जियों और फलों को जिन्हें खाने के लिए अतिरिक्त पानी की आवश्यकता नहीं होती है, उन्हें खाने-पकाने से पहले अच्छी तरह धोना पड़ता है।
  • सफाई चाहे वह घर कार्यालय कार मशीनरी या उस चीज के लिए कुछ भी सफाई कर रहा हो, यह पानी का उपयोग किए बिना संभव नहीं है। सभी सफाई कार्यों के लिए पानी की आवश्यकता होती है।
  • धुलाई कपड़े, बर्तन और कई अन्य चीजों को धोने के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है।
  • स्वच्छता के उद्देश्य के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है। यह स्वच्छता और स्वच्छता बनाए रखने में मदद करता है।
  • कृषि पृथ्वी पर पानी का एक बड़ा हिस्सा कृषि के उद्देश्य से उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से भूमि को उपजाऊ रखने और फसलों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए खेतों की सिंचाई के लिए किया जाता है। इसका उपयोग पशुओं को पालने के लिए भी किया जाता है।
  • उद्योग उद्योग विभिन्न प्रयोजनों के लिए पानी का उपयोग करते हैं। इसका उपयोग विभिन्न उत्पादों के परिवहन निर्माण और प्रसंस्करण में किया जाता है। कुछ उद्योगों को अच्छी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, जिनमें लुगदी और कागज उद्योग शामिल हैं।

जल संकट के कारण –

पृथ्वी में जल संकट के कई कारण है।इनमें से प्रमुख कारण की बात की जाए तो मनुष्य द्वारा जल की की जाने वाली बर्बादी है। पिछले कई वर्षों से भूमिगत जल का स्तर गिरना और सिंचाई एवं अन्य कार्य में भूमिगत जल का अधिक प्रयोग के कारण जल बहुत ही कम हो गया हैं। साथ ही साथ विभिन्न प्रकार के उद्योगों के कारण नदियों का जल प्रदूषित होता है। क्योंकि उनके द्वारा उत्सर्जित प्रदूषण को नदियों में प्रवाहित किया जाता है।इन्हीं कारणों से मानव जगत में पीने लायक जल की उपलब्धता कम होगा।

जल संकट को दूर करने के उपाय –

जल संकट को दूर करने को सबसे अच्छा उपाय है | वृक्षारोपण। पेड़- पौधे वर्षा लाने एवं पर्यावरण में जल के संरक्षण में काफी अधिक सहायक है। इसके अलावा जल संकट को रोकने हेतु नदियों को किनारे स्थापित किए गए उद्योगों के से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ नदियों में ना प्रवाहित किया जाए।और शहरों की नालियों के गंदे पानी को नदियों में बहने से पहले उसे शुद्ध करने नदियों में फेंका जाए। इसके अलावा प्रत्येक नागरिक का या दायित्व बनता है। कि जल संकट को दूर करने के लिए जल के अनावश्यक खर्च को कम करे।घरों में नलों को व्यर्थ में नहीं चलने देना चाहिए। जिससे जल की खपत कम हो सके।

उपसंहार –

मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा है। और अपने लिए भी खतरे की स्थिति पैदा कर ली है। हम सभी का यह दायित्व बनता है। कि वह प्रकृति का श्रेष्ठ प्राणी होने के नाते जल संकट कि समस्या के समाधान हेतु जल संरक्षण पर अधिक जोर दें। जल मनुष्य ही नहीं पृथ्वी के संपूर्ण प्राणी के लिए अति आवश्यक है। इसीलिए जल को जीवन की संज्ञा प्रदान की गई है। यदि जल की समुचित मात्र पृथ्वी पर नहीं होगी। तो तापमान में वृद्धि के कारण प्राणियों का जीना बहुत मुश्किल हो जाएगा।


Save Water Essay In Hindi – Jal Hi Jivan Hai


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Jal hi jivan hai

प्रस्तावना –

पृथ्वी पर जल प्रकृति के अनमोल उपहारों में से एक है। मनुष्य के शरीर में लगभग दो तिहाई भाग पानी का होता है | जिससे यह साबित हो जाता है कि जल का हमारे जीवन में कितना महत्व है। धरती पर रहने वाले हर प्राणी को पानी की जरूरत होती है, इसके अलावा पेड़-पौधों को भी जल की जरूरत होती है, इसलिए सही कहा गया है जल बिना जीवन नहीं ।

जल आमतौर पर समुद्रए झीलोंए तालाबए कुए और नहरों आदि में मिलता है। समुद्र में पाया जाने वाला जल हमारे पीने लायक नहीं होता | क्योंकि यह पानी ज्यादातर खारा होता है, इसे पीने लायक बनाना बहुत कठिन कार्य माना जाता है।

वैज्ञानिक समुद्र के जल को बनाने के लिए रोजाना नए प्रयोग कर रहे हैं। हमारा जीवन पानी पर ही टिका हुआ है पानी हमारे जीवन के लिए कितना जरूरी है। यह धरती पर रहने वाला हर प्राणी जानता और समझता है | किंतु यह जानते हुए भी कि हमारे लिए पानी की कीमत क्या है। हम इसे रोजाना ऐसे ही बर्बाद होने देते हैं, जितने जल की जरूरत होती है | हम उससे कहीं ज्यादा जल ऐसे ही बर्बाद कर देते हैं।

इसके अलावा निरंतर हो रहा जल प्रदूषण हमारे लिए समस्या खड़ी कर रहा है, देश के कुछ भाग तो ऐसे हैं, जहां पीने लायक शुद्ध पानी मिल पाना बहुत कठिन कार्य हो गया है। अगर मिलता भी है तो ऐसे में उन्हें मीलों दूर जाकर पानी मिलता है जिससे उनका आधा दिन तो पानी लाने में निकल जाता है, दूसरी तरफ बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण पानी की खपत दिनोंदिन बढ़ रही है | जिस कारण लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

सृष्टि की रचना क्षितिज, जल, पावक, गगन और वायु इन पांच तत्वों से हुई है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले समस्त प्राणियों एवं पौधों के जीवन का आधार जल ही है उसके बिना जीवन संभव नहीं है, अतः ऐसी मूल्यवान वस्तु का संरक्षण करना सबके लिए जरूरी है।

संपूर्ण पृथ्वी पर जल का प्रतिशत 71% है, जल के बिना मानव जीवन की कल्पना करना रात में तारे देखने के बराबर है।

जल का महत्व –

पृथ्वी के जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों, फसलों, वनस्पतियों पेड़-पौधों आदि सभी के लिए जल अनिवार्य है। बिना जल के इन सभी का रह पाना संभव नहीं है। जल से संसार में जीवन है, चारों ओर फैली हरियाली, फसलें फल-फूल आदि सभी जल के कारण ही जीवित है | मानव जल के बिना जीवित रह ही नहीं सकता ।

  • जल के बिना पृथ्वी पर कोई भी मनुष्य जीव जंतु जीवित नहीं रह सकता।
  • फसलों के उत्पादन और कृषि के लिए जल का इस्तेमाल किया जाता है।
  • जल पीने से पाचन शरीर का तापमान एपरिसंचरण और अन्य गतिविधियां बेहतर होती है।
  • पौधे अपना भोजन बनाने के लिए जल का उपयोग करते हैं।
  • पानी का उपयोग सिर्फ पीने के लिए ही नहीं बल्कि कपड़े साफ करने के लिएए घर की सफाई के लिएए बर्तन धोने के लिएए खाना पकाने के लिए भी किया जाता है।
  • जल से बिजली तैयार की जाती है जो मनुष्य के लिए काफी उपयोगी है।
  • जल का उपयोग मशीनों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है।
  • बिना जल के कोई पौधे विकसित नहीं हो सकते हैं।
  • वर्षा के रूप में जल का बहुत महत्व है वर्षा होने पर सभी पेड़.पौधे हरे हो जाते हैं। और उन्हें नया जीवन प्राप्त होता है।

जल के विभिन्न स्रोत –

जल प्राप्त करने के कई स्रोत हैं। सागर में अथाह जल भरा है, किंतु वह पानी पीने योग्य नहीं है, इसलिए वह हर प्रकार की पूर्ति नहीं कर सकता पानी का मूल स्रोत वर्षा है, वर्षा का पानी ही नदियों तालाबों जलाशयों में एकत्रित होकर जल की पूर्ति करता है। इसके अतिरिक्त पहाड़ों पर जमने वाली बर्फ पिघल कर जल के रूप में नदियों में आती है कुआ, नलकूप आदि के द्वारा पृथ्वी के नीचे विद्यमान जल को प्राप्त किया जाता है। इस तरह विभिन्न स्रोतों द्वारा जल की पूर्ति की जाती है।

जल का उपयोग –

  • कृषि कार्य में

कृषि का आधार जल ही है जल के बिना कृषि नहीं की जा सकती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जहां कृषि का महत्व इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय कृषि विश्व की 17.5% जनसंख्या का पालन-पोषण करती है | इसलिए भारत में कृषि का विशेष महत्व है। कृषि का आधार जल ही है।

  • घरेलू कार्यों में –

घरों में खाना बनाने, बर्तन साफ करने आदि के लिए जल का उपयोग किया जाता है।

  • उद्योगों में –

विभिन्न उद्योगों जैसे सूती वस्त्र उद्योग में जल का उपयोग रेशों को साफ करने के लिए किया जाता है। बिना जल के यह उद्योग स्थापित नहीं हो सकता है, इसके अतिरिक्त जल विद्युत प्रणाली उद्योगों को सस्ती जल विद्युत उपलब्ध कराती है।

1.पेय हेतु –

जल का सर्वाधिक उपयोग पेयजल के रूप में होता है। जल के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती जल के बिना मानव 3 दिन से अधिक जीवित नहीं रह सकता।

2.जल का अभाव –

विगत वर्षों में जल की निरंतर कमी हो रही है वर्षा कम हो रही है। धरती का जल स्तर लगातार गिर रहा है जल की समस्या भारत में ही नहीं संसार भर में हो रही है कुछ स्थानों पर तो जल के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। क्या आपको पता है संसार का तीसरा विश्व युद्ध जल के लिए होगा।

हम जल का संरक्षण किस प्रकार करेंगे

  • हम जल संरक्षण करने के लिए कुछ प्रयास कर सकते हैं।
  • जरूरत अनुसार जल का उपयोग करें।
  • अगर गिलास में पानी बचा है तो उसे पौधे में डाल दें।
  • वाहन दुकान पर जाकर साफ न कराएं बल्कि एक बाल्टी पानी से ही अपने बहन को साफ करें।
  • जरूरत से ज्यादा पानी का उपयोग न करें।
  • परंपरागत जल संरक्षण की तकनीक अपनाएं और पानी बचाएं।
  • पानी पीने के लिए गिलास उतना ही भरे जितना पानी पीना हो

जल समस्या का समाधान –

जल की कमी को देखते हुए यह आवश्यक है, कि यह समस्या भयंकर रूप धारण करें, उससे पहले ही हमें जल संरक्षण के बारे में सोचना होगा जल का पूरी तरह से सदुपयोग करना होगा। वर्षा के समय जो पानी नालों व नदियों के द्वारा बहकर समुद्र में पहुंच जाता है उसे इकट्ठा करने का प्रयास करना होगा वर्षा काल में पानी को पृथ्वी में नीचे पहुंचाया जाए तो जल स्तर ऊपर आएगा। इसलिए इस समस्या के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है ।

भारत के किन राज्यों में जल का उपयोग सबसे अधिक होता है

भारत के जिन राज्यों में धान की खेती की जाती है जैसे पंजाब हरियाणा और पश्चिम बंगाल वहां पर भूजल का बहुत अधिक उपयोग होता है। क्योंकि धान की खेती के लिए पानी की बहुत मात्रा में आवश्यकता होती है।

भारत के कुछ राज्य ऐसे हैं जो भूजल क्षमता का बहुत कम उपयोग करते हैं, जैसे छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल और गुजरात, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार, महाराष्ट्र अपने भूजल संसाधनों का मध्यम उपयोग करते हैं।

विश्व जल दिवस –

विश्व जल संरक्षण दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। वर्ष 2021 में इसकी मुख्य थीम थी। पानी का महत्व वर्ष 1992 में रियो डी जेनेरियो मैं आयोजित संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण व विकास की बैठक में स्वच्छ जल हेतु एक अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

22 मार्च 1993 को पहला विश्व जल दिवस मनाया गया और वर्ष 2003 से “UN वाटर” नामक एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत स्वच्छ जल संसाधनों सफाई व जल से संबंधित आपदाओं के मुद्दों पर कार्य किए जाते हैं।

भारत के पहले जल पुरुष –

राजेंद्र सिंह को भारत के जल पुरुष के नाम से जाना जाता है। राजेंद्र सिंह तरुण भारत संघ नामक गैर सरकारी संगठन के चेयरमैन है। वर्ष 2001 में राजेंद्र सिंह को रेमन मैग्सेसे’ पुरस्कार’ एवं वर्ष 2015 में ‘स्टॉकहोम वाटर प्राइज’ दिया गया था।

उपसंहार –

यदि समय रहते जल संरक्षण की ओर ध्यान न दिया गया तो संसार का विनाश हो जाएगा | जल के बिना किसी का भी जीवत रहना संभव नहीं है बिना जल के विनाश अवश्य संभव है।

सत्य यह है की जल ही जीवन है इसलिए जल की पूर्ति आवश्यक है। अतः अब समय आ गया है कि बिना समय गवाये और विलंब किए। मानव को जल के अपव्यय को रोकने के साथ-साथ उसके संरक्षण हेतु प्रभावी उपाय करने चाहिए। तभी हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा |

मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा है, और अपने लिए खतरे की स्थिति उत्पन्न कर ली है। अब प्रकृति का श्रेष्ठतम प्राणी होने के नाते उसका यह कर्तव्य बनता है कि वह जल संकट की समस्या के लिए जल संरक्षण पर जोर दें। जल मनुष्य ही नहीं पृथ्वी के हर प्राणी के लिए आवश्यक है इसलिए जल को जीवन की संज्ञा दी गई है।

इस समय जल प्रदूषण एवं जल संकट के लिए मनुष्य ही जिम्मेदार है इसलिए अपने अस्तित्व की नहीं बल्कि पृथ्वी की रक्षा के लिए भी मनुष्य को जल संकट का समाधान शीघ्र ही करना होगा और उसे इस समस्या के समाधान के लिए जल संरक्षण के महत्व को स्वीकार करना होगा तभी मानव का अस्तित्व बचाया जा सकता है।

आज जरूरत है हमें पानी की एक-एक बूंद को बचाने की जितनी जरूरत हो, उसके मुताबिक ही हमें पानी को इस्तेमाल करना चाहिए | क्योंकि हम भविष्य में तभी जिंदा रह सकते हैं | यदि हम जल का संरक्षण करेंगे। यह आपके लिये हम सलाह नहीं दे रहे चेतावनी दे रहे हैं।

नदियाँ है संजीवनी, रखे सब उसे साफ ।
जो करे गंदगी वहाँ, नहीं करें अब माफ ।।
जल प्रदूषित नहीं करो, जीवन का है अंग ।
स्वच्छ निर्मल पावन रहे, बदले नाही रंग ।।


Importance Of Water Essay(Jal Hi Jivan Hai)


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भूमिका –

जल को हमारे जीवन का मूल्यवान धरोहर कहे या ये कहे की इसके बिना जीवन के बारे में सोच भी नही सकते, तो ये गलत भी नहीं होगा। धरती के सभी सजीव जगत को जीवित रहने के लिए जिस प्रकार वायु की आवश्यकता है। ठीक उसी तरह जल की है। क्योंकि वायु और जल ये तो ऐसे तत्व हैं। जिनके बिना पृथ्वी पर सजीव जगत की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। जिस प्रकार हमें जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता है। जिसे हम वायु द्वारा प्राप्त करते हैं।

वायु और मिट्टी आदि की तरह ही जल भी हमारे लिए प्रकृति प्रदत एक अमूल्य उपहार है और प्रकृति ने अन्य संसाधनों के तरह ही इसे भी हमे सीमित मात्रा में ही प्रदान किया है। क्योंकि हमारे पृथ्वी के केवल 70% हिस्से में ही जल है | जिसमे मात्र 2% जल पीने योग्य है।

जल के स्रोत –

भूमि पर पानी के दो मुख्य स्रोत है

  • भू पृष्ठ जल
  • भूमिगत जल।

1.भूमिगत जल –

वर्षा अवक्षेपण/बह जाने वाले जल का कुछ भाग धरती की सोखने की क्षमता के कारण सतह के नीचे चला जाता है। यह पानी भूमिगत जल तक पहुंच जाता है। धरती के नीचे के इस पानी की ऊपरी सतह को ग्राउंड वाटर टेबल भूमिगत जल स्तर कहते हैं। वर्षा की विभिन्नता तथा कुओं द्वारा इस पानी की निकासी के कारण यह ग्राउंड वाटर लेवल ऊपर नीचे होता रहता है। जब किसी कुएँ से पानी बाहर निकाला जा रहा होता है | तब आस पास का भूमिगत जल बह कर उस कुएं में आ जाता है। ग्राऊंड वाटर की स्थिति तथा उस इलाके के भूवैज्ञानिक रचना ही भूमिगत पूर्ति के विकास का आधार बनते हैं।

2.भू पृष्ठ जल –

जब भी अच्छी गुणवत्ता का पानी सतह जल के रूप में उपलब्ध हो, उसे ही पानी के स्त्रोत की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। इससे कुआं खोदने का खर्च तथा जमीन के नीचे से पानी उठाने का खर्च बचता है। सतह जल के स्रोतों का वर्गीकरण इस प्रकार किया जा सकता है।

  • प्रवाह (छोटी नदी)
  • झील
  • तालाब
  • जलाशय
  • नलकूप, जल भंडारण एवं आपूर्ति संरचना
  • नदी तथा
  • वर्षा एकत्रण जल व्यवस्था

हमारे जीवन में जल का महत्व –

हम सब जानते है, जल ही जीवन है इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। एक मात्र पृथ्वी ही ऐसा गृह है, जहाँ जल होने के कारण जीवन संभव है। हमारे दैनिक कार्य जैसे पीने के लिये पानी नहाने के लिये, कपड़े धोने के लिये, खाना बनाने के लिये, घर की सफाई करने, बर्तन को साफ़ करने के लिये और भी अन्य काम को करने के लिये भी हमें जल की जरूरत होती है।


जल प्रत्येक जीव की आवश्यकता है, चाहे जानवर हो या पशु.पक्षी, जलचर तो जल में ही निवास करते है। जल के बिना जीवित रहना असंभव है। हमारी पृथ्वी पर जल के कई स्त्रोत है जैसे नदीए तालाबए कुआँ, झील, झरने, समुद्र इत्यादि हमें इन सभी को स्वच्छ रखना चाहिये जिससे जल का सही उपयोग हो सके।

जल की हर एक बूंद कीमती है। जल हमारे पर्यावरण का संतुलन बनाये रखने में हमारी मदद करता है। जल के चक्रण से वर्षा होती है और वर्षा का जल दोवारा नदियों और समुद्रों में पहुँच जाता है। इसलिये जल के महत्व्व को समझते हुये हमें बर्बाद नहीं करना चाहिये। जल की वजह से ही फसलें, सब्जियाँ, फल आदि पैदा होते है और इनको खाकर हम जीवित रह पाते है अगर देखा जाये तो जल जीवन की सबसे पहली आवश्यकता है।

आज हमारी पृथ्वी पर पीने के साफ़ जल की कमी होती जा रही है क्योंकि हम सब मिलकर पानी को दूषित कर रहे है और पीने के लिये साफ़ जल हमें मुश्किल से उपलब्ध होता है अगर ऐसा ही चलता रहा तो पीने लायक पानी पृथ्वी पर नहीं बचेगा इसीलिये हमें जल को स्वच्छ रखना चाहिये।

जल न केवल हमारी प्यास की पूर्ति करता है बल्कि बिजली बनाने के लिये भी हम जल का उपयोग करते है। नदियों के जल पर बांध बनाए जाते है फिर बिजली बनाई जाती है और बाद में इस जल का उपयोग खेतों में सिंचाई के लिये किया जाता है। हमें जल की एक एक बूंद को बचाकर काम करना चाहिये जल का बिलकुल भी दुरूपयोग नहीं करना चाहिये क्यों कि जल की जरूरत हमारी जिन्दगी में बहुत अधिक है।

पृथ्वी की गर्मी के कारण हमारे ग्लेशियर पिघलते जा रहे। अतः अगर हम इसी तरह जल की बर्बादी करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी नदियाँ भी सूख जायेंगी इसीलिए जल की कीमत समझते हुये हमें आज से ही प्रण करना चाहिये कि हम जल को न तो बर्बाद करेंगे और न दूषित और किसी को करने देंगे।

जल प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं –

जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव आज न सिर्फ मानव जीवन को बल्कि सभी जलीय जीव, स्थानीय पशु-पक्षियों, कीट-पतंगे, पेड़-पौधों को भी प्रभावित किया है। क्योंकि कल-कारखानो एवं बहिःस्त्राव में उपस्थित अनेक विषैले पदार्थ जलीय जीवन को नष्ट कर देती है। इतना ही नहीं ये जलीय जीवो की विविधता को भी घटा देती है।

यदि पर्याप्त मात्रा में पौधों को जल की प्राप्ति नहीं हो पाती है तो वह भी सूख जाती है। इन बातो से स्पष्ट हो जाती है कि, दूषित जल से पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं का विनाश हो जाता है। दूषित जल के प्रयोग से आज लोगो को हैजा, एग्जिमा, उदरशूल, नारू, अतिशय,टाइफाइड, पीलिया, पेचिश आदि नामक भयंकर बीमारियो का सामना करना पड़ रहा है।

आज कल जल इतनी प्रदूषित हो चुकी है किए लोगों को पीने योग्य पानी नहीं मिल रही है। उपरोक्त बातो से स्पष्ट हो जाती है किए जल प्रदूषण आज संपूर्ण विश्व के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

जल संरक्षण के कुछ उपाय –

आज जिस तरह से लोग जल की महत्ता को भूलकर इसकी अंधाधुध और अनियंत्रित दोहन कर रहे हैं। अगर यह स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में जल संकट संसार के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा। अतः समय रहते हमे इनकी संरक्षण करनी चाहिए तो आइए जानते हैं

जल संरक्षण के कुछ सरल उपाय

  • कल कारखानों के अवशिष्ट पदार्थों को नदियों और समुद्रों में बहाने पर रोक लगाना चाहिए क्योंकि इन अपशिष्ट पदार्थों में विद्यमान विषैले तत्व नदियों के जल में घोलकर उसे भी विषैला बना देती है।
  • लोगों को नदियाँए पोखर या फिर कहे तो ताल तलैया के जल में साबुनए शैंपू आदि से नहाने और कपड़े धोने से लोगो को रोकना चाहिए।
  • गिरते भूगर्भ जल-स्तर को स्थिर करना होगा।
  • बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर पानी एकत्र करना होगा।
  • वर्षा जल को संग्रहित करना होगा।
  • लोगों को आवश्यकता अनुसार ही पानी उपयोग करने का सलाह देना होगा।

विश्व जल दिवस –

जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष संपूर्ण विश्व 22 मार्च को श्विश्व जल दिवस के रूप में मनाती है। ताकि लोग इसकी महत्ता को समझ सके और इसकी हो रही अनियंत्रित दोहन को रोकने में सफल हो सके।

उपसंहार –

जल उन बहुमूल्य संसाधनो में से एक है। जो न सिर्फ हमे बल्कि संसार के समस्त सजीव जगत को जीवित रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में उसे आवश्यक तत्व उपलब्ध कराती है। परंतु आज आधुनिकता के इस युग में इसकी हो रही अनियंत्रित दोहन आने वाले समय में हमारे सामने एक बहुत ही गंभीर समस्या के रूप में प्रकट होगी।

जल संरक्षण हमारा दायित्व ही नही कर्तव्य भी है। जिसका सामना न सिर्फ हम मानव को बल्कि पृथ्वी के सभी सजीव जगत को करना पड़ेगा। अतः इन समस्याओं से बचने के लिए हमे जल संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाना चाहिए।


Save Water Essay – (Jal Hi Jivan Hai)


an essay on water pollution
Jal hi jivan hai

प्रस्तावना –

जल एक ऐसा शब्द है जो जीवन में आदि से अंत तक विद्यमान रहता है। जल शब्द दो स्वरूपों में हमारे सामने आता हैः प्रथम तो वह नीर के रूप में और द्वितीय “जल” अर्थात आज्ञावाची स्वरूप में जलने की क्रिया। ये दोनों ही स्वरूप जीवन के आदि और अंत से सम्बंध रखते हैं।

जल के नीर स्वरूप के सम्बंध में जब हम बात करते हैं तो स्पष्ट होता है कि यदि जल नहीं होता तो पृथ्वी पर जीवन की सम्भावना भी नहीं होती। जल की उत्पत्ति ही जीवन की उत्पत्ति का कारण है। पृथ्वी के प्रादुर्भाव एवं उसके तापीय स्वरूप के शांत होने के बाद हजारों वर्षों के अंतराल के बाद पृथ्वी पर सर्वप्रथम प्राकृतिक रूप से जल की उत्पत्ति हुई। जल के प्रादुर्भाव से वनस्पतियों और प्राणियों की उत्पत्ति हुई।

यदि जल का प्रादुर्भाव नहीं होता तो वनस्पतियों और प्राणियों की कल्पना कर पाना सम्भव नहीं थी | जीवन की कल्पना ही असम्भव थी। प्रकृति द्वारा प्राणी जगत के निर्माण में जिन तत्वों का उपयोग किया गया है, उनमें जल ही प्रधान तत्व है। जल और वायु दो ऐसे तत्व हैं, जो प्राणी के शरीर में नित्य प्रति नियमित रूप से संचरित होते रहते हैं। शेष तत्व स्थिर अवस्था में रहते हैं।

जल का महत्व –

जल और वायु के निरंतर आवागमन से ही जीवन क्रिया संचालित होती है तथा इनके रुक जाने पर जीवन समाप्त हो जाता है। पृथ्वी, अग्नि और आकाश जो शरीर के शेष स्थिर तत्व हैं, वे भी बिखर जाते हैं। अब उस प्राणहीन शरीर को जल के दूसरे स्वरूप (जलने) को समर्पित कर दिया जाता है। जल से उत्पत्ति, जल से जीवन, जल के अभाव में पंच तत्वों का बिखरना तथा अंत में जलने की क्रिया को समर्पित किया जाना यह सिद्ध कर देता है कि जल बिना जीवन सम्भव नहीं है, जल ही जीवन का मूलाधार है।

क्यों कम हो रहे हैं जल स्रोत –

धरातल के ऊपर वायुमंडल में, धरातल पर समुंद्र में और धरा के अंतः गर्भ में जितना भी जल उपलब्ध है उसकी कुल मात्रा निश्चित है। वह न घट सकती है, न बढ़ सकती है, चाहे वह द्रव, ठोस या गैस किसी भी रूप में उपलब्ध हो। वायुमंडल और तापमान के प्रभाव से इनके रूपों में परिवर्तन होता रहता है।

पेयजल का यह भंडार धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। प्रदूषित जल का औसत बढ़ता जा रहा है। इस असंतुलन को पैदा करने में कुछ सम्भावित कारण हो सकते हैं, यथाः

  • वनों के अधिक काटने से वर्षा का क्रम बदल जाना और वर्षा की मात्रा में अनापेक्षित कमी आ जाना।
  • जनसंख्या का अत्यधिक बढ़ता हुआ दबावए जिससे जल का असीमित दोहन होना।
  • भूमि से जल उत्सर्जन कार्य में मशीनी उपयोग से द्रुत गति से दोहन एवं जल की अत्यधिक बर्बादी।
  • पेयजल का अत्यधिक दुरुपयोग करने की चिंतन विहीन मानसिकता।
  • सरकारए सामाजिक संगठनों एवं जागरूक लोगों द्वारा बार.बार जल संकट के लिये आगाह किए जाने पर भी जन.मानस का लापरवाह होना।
  • वर्षा.जल को संचित करने के प्रति संवेदनाओं का अभाव होना।
  • भूजल के पुनर्भरण के प्रति जागरूकता का अभाव होना।
  • जल की मितव्ययता की भावना का अभाव होना।
  • कृषि कार्य में सर्वाधिक प्रयोग पेयजल का ही होना।
  • कृषि कार्यों में प्रयुक्त कीटनाशक एवं उर्वरकों द्वारा पेयजल को प्रदूषित बनाकर पीने योग्य न छोड़ना।
  • बहते जल स्रोतों को कल.कारखानों के दूषित जलए गंदे नालों एवं शव विसर्जन से प्रदूषित कर पीने योग्य न छोड़ना।

जल की उपयोगिता

पानी का विविध उपयोग है। पीने के लिए तो पानी चाहिए ही। घरेलू कार्यों, सिंचाईए उद्योगों, जन स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा मल-मूत्र की निकासी के लिए जल अपरिहार्य है। जल विद्युत के निर्माण तथा परमाणु संयंत्रों के शीतलन के लिए विशाल जल राशि निरंतर चाहिए।

मत्स्य पालन, वानिकी और जल क्रीड़ाओं की कल्पना जल के बिना नहीं की जा सकती। पर्यटन को विकसित तथा बढ़ावा देने में पानी की विशेष भूमिका है। कृषि अर्थव्यवस्था का तो जल अभिन्न अंग है। इस प्रकार जल सभी प्रकार के विकास कार्य के लिए आवश्यक है। इसका उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में आवश्यक है और उपयोग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। नगरों के बढ़ने के कारण नगरों में जल की मांग प्रतिदिन बढ़ रही है।

भारत कृषि प्रधान देश है। अतरू सिंचाई के लिए विशाल जल-राशि की आवश्यकता होती है। वर्ष 2000 में सिंचाई के लिए 536 अरब घन मीटर जल का उपयोग किया गया। यह उपयोग की गई कुल जल राशि का 81 प्रतिशत है। शेष प्रतिशत जल का उपयोग घरेलू कार्यों, उद्योगों, ऊर्जा तथा अन्य कामों में होता है।

भारत में सिंचाई की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। सिंचाई की मांग बढ़ने के प्रमुख कारण हैं –

  • वर्षा के वितरण में क्षेत्रीय और ऋतुवत असमानताए
  • वर्षाकाल में भारी अन्तर और अनिश्चितता,
  • वाणिज्यिक फसलों के लिए जल की बढ़ती मांग,
  • फसलों का बदलता प्रतिरूप।
  • जनहित में यह सूचना जारी, जल संरक्षण की करो तैयारी|

इसके अतिरिक्त अन्य भी बहुत से ऐसे कारण हो सकते हैं जो पेयजल का अभाव पैदा करने के लिये उत्तरदायी हों। किन्तु यदि हम उक्त कारणों का ही निदान कर लें तो समस्या का बहुत अधिक सीमा तक निदान सम्भव है। हम पानी का मूल्य समझें, मितव्ययी बनें, पानी की बर्बादी रोकें | लोगों में जागरूकता लाएं सरकार भी अपने दायित्वों को ईमानदारी एवं कड़ाई के साथ निभाए, नदियों का प्रदूषण रोका जाए एवं उनकी सफाई कराई जाए, वर्षा जल के संचय पर सर्वाधिक ध्यान दिया जाए |

वर्षा जल संचय के साधन विकसित किए जाएँ, ऐसी व्यवस्था की जाए कि बाढ़ और वर्षा का जल बहकर पुनः समुद्र में न पहुँचे अपितु सीधा पृथ्वी के अंदर जा सके ताकि भूगर्भ जल का पुनर्भरण हो सके। इसके लिये सम्भावित क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए बड़े-बड़े जालीदार बोर करा के पानी को भूगर्भ में पहुँचाया जाए, प्रदूषित जल का शोधन करने के साधन जुटाए जाएँ, ऐसे बड़े तालाबों को विकसित किया जाए, जिनमें वर्षा और बाढ़ के जल को संचित कर सिंचाई में उपयोग किया जा सके।

उपसंहार –

यदि हम जल समस्या के प्रति जागरूक हैं और उसी के अनुरूप व्यवहार का आचरण करते हैं तो कुछ सीमा तक जीवन के इस अमूल्य आधार को सुरक्षित रख पाएँगे, क्योंकि इसकी सुरक्षा में ही हमारे जीवन की सुरक्षा का रहस्य छुपा हुआ है। अन्यथा की स्थिति में संकट ही संकट है जो हमारे प्राणों को भी संकट में डाल सकता है। अतः हमको जागना ही होगा।

(Source :Learning Hub Academy)

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